नया भू अर्जन कानून लागू होने के बावजूद एचपीडीए के अधिकारियों ने अनेक किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए पुरानी दर से अवार्ड करा दिया है। इसको लेकर चमरी के एक किसान ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराना भू अर्जन कानून रद्द करने के बाद केन्द्र सरकार ने 2013 में नया भू अर्जन कानून बनाया था। उसको जनवरी 2014 से लागू कर दिया गया।
इसमें रक्षा, एनएच और बिजली के मामलों को छोड़कर किसानों की भूमि का अधिग्रहण करने के लिए अवार्ड किए जाने पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि अब सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जा रहा है।
चमरी निवासी अजय त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में बताया है कि उसके पिता सुखबीर सिंह के नाम गांव में 25 बीघा जमीन ऐसी है, जिसका एचपीडीए ने आनंद विहार कालोनी के लिए अधिग्रहण कराने की कार्रवाई की थी।
इसके खिलाफ वह लोग अदालत में मुकदमा लड़ रहे हैं। नया भू अर्जन कानून जनवरी 2014 से लागू हो गया है। जिसमें स्पष्ट है कि किसानों की भूमि का अधिग्रहण किये जाने के लिए सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा देना पड़ेगा।
इसके बावजूद एचपीडीए के अधिकारियों ने एडीएम (भू अर्जन) गाजियाबाद के माध्यम से उक्त जमीन 28 अक्तूबर 2016 को पुरानी दर पर ही अवार्ड घोषित करा दी। यह यह किसानों के साथ अन्याय है।
ऐसा कई अन्य किसानों के साथ हुआ है। जबकि इस भूमि का प्रयोजन केवल आवासीय कालोनी या कामर्शियल भूखंड काटकर बेचना है, जिसके लिए अवार्ड हो ही नहीं सकता।
किसानों की जमीन मनमाने दाम पर हड़प कर मानसिक और आर्थिक रूप से शोषण नये भू अर्जन कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की गुहार लगायी है।