85 फीसदी कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं को हुई नॉन कोविड संतान
हापुड़। कोरोना महामारी की तीनों लहर में 1520 संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रसव हुए, लेकिन इसमें 85 फीसदी महिलाओं को नॉन कोविड संतान हुई। सिर्फ 15 फीसदी नवजात ही कोरोना संक्रमित मिले, इनमें दो बच्चे आईसीयू में भर्ती रखने पड़े, बाकी सात दिन में स्वस्थ हो गए। तीनों ही लहरों में जिले के अंदर शिशु मृत्यु दर शून्य रही है।
संक्रमण की शुरूआती दो लहरों में अस्पतालों की ओपीडी बंद हो गई, प्राइवेट अस्पतालों ने सिर्फ फोन पर ही परामर्श देने की पहल शुरू की। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ा। प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं की जांच आवश्यक कर दी गई, इसमें जो महिला संक्रमित निकलती थी उसे पिलखुवा के मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता था।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार दो अप्रैल 2020 से 28 फरवरी 2022 तक कुल 1520 कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया गया। इसमें 1292 स्वस्थ नवजात का जन्म हुआ। जिन्हें बाद में भी संक्रमण नहीं हुआ। जबकि 228 नवजात कोरोना संक्रमित मिले, इनमें अधिकांश बच्चे जन्म के बाद माता के संपर्क में आने से ही बीमार पड़े।
लेकिन इन नवजात बच्चों के अंदर की इम्यूनिटी ने संक्रमण को हावी नहीं होने दिया। सिर्फ सात दिन के अंदर ही 226 बच्चे स्वस्थ हो गए, जबकि, दो बच्चों की हालत बिगड़ी, क्योंकि वह समय से पहले जन्में थे उन्हें आईसीयू में भी भर्ती रखना पड़ा।
तीनों लहरों में संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रसव की स्थिति-
लहर संक्रमित गर्भवति संक्रमित संतान
पहली लहर 340 45
दूसरी लहर 852 132
तीसरी लहर 328 51
पांच बच्चों की दो दिन में निगेटिव आई रिपोर्ट
कोरोना की चपेट में आए नवजात बच्चों में पांच ने सिर्फ दो दिन के अंदर ही संक्रमण पर जीत पा ली। संक्रमित आने के दो दिन बाद इनकी जांच की गई थी, जबकि अन्य बच्चों को स्वस्थ होने में सात दिन तक का समय लग गया।
बच्चों का प्रतिरोधक तंत्र बना रामबाण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश गोयल ने बताया कि बच्चों के अंदर का प्रतिरोधक तंत्र महामारी से पार पाने में रामबाण बना। छोटे बच्चों में कम प्रतिरोधक क्षमता होना भी उनके लिए फायदेमंद रहा, क्योंकि वायरस के अंदर प्रवेश करने पर प्रतिरोधक तंत्र को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी, जिसके चलते बुखार भी नहीं बना। जिन बच्चों को संक्रमण हुआ वह स्वत ही सात दिनों में ठीक हो गया।
कोविड से ज्यादा पोस्ट कोविड का खतरा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सचिव बंसल ने बताया कि बच्चों पर कोरोना का असर कम रहा, जबकि पोस्ट कोविड जान पर भारी पड़ गया। दूसरी लहर में संक्रमित हुए बच्चों में स्वस्थ होने के बाद अचानक तेज बुखार, बेहोशी छाने जैसे लक्षण मिले, हालांकि तीसरी लहर में पोस्ट कोविड का असर इतना खतरनाक नहीं है।
बच्चों को संक्रमित करने वाले कारण
* प्रसव के बाद मां के संपर्क में आने से।
* संक्रमित धातु को छूकर मुहं आदि पर हाथ लगाने से।
* बाहर से आए संक्रमित लोगों के बच्चे को गोद में लेने से।
अधिकांश नवजात बच्चे रहे नॉन कोविड-
कोरोना की तीनों लहरों में जन्में 85 प्रतिशत बच्चे नॉन कोविड रहे, जो बच्चे संक्रमित हुए भी वह सात दिन के अंदर स्वस्थ हो गए। संक्रमित गर्भवतियों के प्रसव के लिए अलग से व्यवस्था करायी गई थी।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।