दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने अनेक कामगार योजनाएं चलाई हैं, लेकिन योजनाओं का गरीब पशुपालकों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की सरकार ने 1.32 करोड़ रुपये की लागत से कामधेनु डेयरी योजना, 52 लाख की मिनी कामधेनू योजना और 25 लाख रुपये की माइक्रो मिनी कामधेनु डेयरी योजना लागू की थी।
इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पशुपालक को 25 फीसदी मार्जिन मनी वहन करनी है। छोटे पशुपालकों को इतनी मार्जिन मनी वहन करना लगभग असंभव है। वहीं सरकार की ओर से कुक्कुट विकास योजना शुरू की गई है।
इसके तहत जिले में 1.80 करोड़ और 70 लाख रुपये की लागत से दो अंडा उत्पादन की इकाईयां स्थापित होनी हैं। लेकिन इतनी बड़ी योजना का लाभ गरीब पशुपालक उठा सकेंगे, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
आलम यह है कि पशु पालन विभाग से संचालित दुग्ध, अंडा उत्पादन इकाईयों का लाभ सिर्फ सक्षम और बड़े पशुपालक उठा रहे हैं। छोटे पशुपालक कम पैसों की कोई योजना शुरू होने के इंतजार में पशुपालन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.वाईपी सिंह का कहना है कि शासन से दुग्ध उत्पादन की इकाइयां तीन श्रेणियों में लांच की जा चुकी हैं। इनका लाभ पशुपालक उठा रहे हैं। भविष्य में छोटी योजना आने की उम्मीद हैं, इनका लाभ पशुपालकों को दिया जाएगा।