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गोमाता के भरण-पोषण पर करोड़ों खर्च, फिर भी बीमार

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हमीरपुर। जिले में करीब 32 हजार गोवंश संरक्षित करने का दावा पशुपालन विभाग कर रहा है। वहीं मौजूदा समय में 37 हजार 834 अन्ना गोवंश हैं। अन्ना मवेशियों के लिए 333 गोवंश आश्रय स्थलों में 36 हजार 247 मवेशी संरक्षित करने का दावा किया जा रहा है। इनके भरण पोषण में वर्ष 2018 से अब तक साढ़े 13 करोड़ खर्च हो चुके हैं। वहीं तीन करोड़ से अधिक की धनराशि अभी डंप है। लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो मवेशियों की सेहत में कोई परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है।
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बीते 9 सितंबर को प्रदेश के सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गोशालाओं की नियमित सफाई व चारे और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। साथ ही प्रत्येक गोशाला की देखरेख के लिए पशुचिकित्साधिकारी नामित हों। वहीं तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन हो रही बारिश में कई गोशाला दलदल में तब्दील हैं। इन्हीं मवेशियों को रखा जा रहा है।
मवेशी बीमार हैं। बतादें वर्ष 2018-19 में 150 लाख, वर्ष 2019-20 में 687 लाख व वर्ष 2020-21 में 820 लाख की धनराशि मवेशियों के भरण पोषण के नाम पर अवमुक्त की गई है। जिसमें 12 करोड़ 10 लाख 91 हजार 820 रुपये खर्च हो चुके हैं।
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वहीं गायों की सुपुर्दगी में 84 लाख 36 हजार 930 रुपये एवं कुपोषण मद में 6 लाख 15 हजार 630 रुपये खर्च किए गए। विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में गोवंश के भरण पोषण के लिए 62 हजार 245 क्विंटल भूसा खरीदा गया है। वहीं 5 हजार 157 क्विंटल भूसा दान-दाताओं ने निराश्रित गोवंश के भरण पोषण को दिया है।
चंदे से जमा हुए 26 लाख
स्थायी व अस्थायी गोवंश के भरण-पोषण के लिए तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश की पहल पर जिले में एक कार्पस फंड बना था। जिससे खनन क्षेत्र व दान-दाताओं को इससे जोड़कर 26 लाख की धनराशि इकट्ठा कराई गई थी। जिसमें 18 लाख भरण पोषण में खर्च की जा चुकी है। वहीं 7 लाख 75 हजार की धनराशि विभाग के पास है।
ग्रामीणों ने बताया
पत्योरा गांव निवासी किसान अरुण कुमार, राजेंद्र दुबे आदि ने बताया अगस्त के आखिरी सप्ताह में अन्ना मवेशी संरक्षित कराए गए हैं। बताया गोशाला में इंटरलाकिंग खड़ंजा न होने से बारिश से जलभराव है। दलदल में गोवंश रात गुजारते हैं। चिकित्सक इनकी देखरेख को नहीं आते हैं।
पाराओझी निवासी किसान शिवकुमार सेठी ने बताया अभी तक पशु आश्रय स्थल पर एक भी मवेशी संरक्षित नहीं हैं। करीब आधा सैकड़ा अन्ना मवेशी सड़कों व खेतों में किसानों की फसलें चौपट कर रहे हैं। जिससे किसान अत्यंत चिंतित हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है।
देवगांव के ग्राम प्रधान जीतेंद्र शिवहरे ने कहा आश्रय स्थल पर करीब एक सैकड़ा गोवंश संरक्षित हैं। कुछ मवेशी जो बाहर घूम रहे हैं। वह उन लोगों के हैं, जो पशु का दूध निकालने के बाद छोड़ देते हैं। मनरेगा से केवल कच्चा काम हो सकता है। ऐसे में गोशालाओं का निर्माण कार्य प्रभावित है।
जिले के 333 आश्रयस्थलों पर कुल 36247 गोवंश संरक्षित हैं। कहा, वर्ष 2020-21 में 820 लाख की धनराशि भरण पोषण के लिए शासन से मिली है। जिसमें करीब तीन करोड़ की धनराशि शेष है। वहीं कुल 67402 क्विंटल भूसा सभी आश्रय स्थलों पर मौजूद है। कहा कुछ आश्रय स्थलों पर जलभराव की समस्या है। जिसको जल्द दूर किया जाएगा। -डा. एके यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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