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भारत बंद का नहीं दिखा असर

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राठ। कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को भारत बंद का असर नहीं दिखा। भारतीय किसान यूनियन ने भारत बंद का आह्वान किया था। यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
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भारतीय किसान यूनियन के बुंदेलखंड महासचिव रामपाल सिंह ने बताया वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान किसान संगठनों से बगैर परामर्श किए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई थी। फिर तीन ऐसे कानून बना दिए जिससे भारत की समस्त जनमानस के जीने का अधिकार उद्योगपतियों के हवाले कर दिया। इन कानूनों के विरोध में किसान संयुक्त मोर्चा दस महीने से आंदोलन चला रही है। जिसमें करीब सात सौ किसान शहीद हो चुके हैं। इसी के विरोध में सोमवार को भाकियू ने भारत बंद का आह्वान किया था।
ज्ञापन में सरकार से कानूनों को वापस करने और किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की मांग की है। इस अवसर पर तहसील अध्यक्ष रामप्रकाश बाबू, जगदीश मिश्रा, रामसनेही राजपूत, बृजकिशोर लोधी, जगदीश सिंह, महिपाल सिंह, मलखान, ओमप्रकाश राजपूत, कल्लू, जितेंद्र आदि मौजूद रहे। वहीं भाकियू ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया था। लेकिन कस्बे में इस बंदी का असर नहीं दिखा। सोमवार सुबह खुली दुकानों पर भाकियू के पदाधिकारी पहुंचे और दुकान बंद करने की बात कही। जिस पर कई दुकानदारों से नोकझोंक हुई।
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बंद के समर्थन में नहीं आए किसान नेता
भरुआसुमेरपुर। किसान आंदोलन के भारत बंद के आह्वान का असर कस्बे में नहीं दिखाई दिया। बस स्टैंड से लेकर रेलवे स्टेशन तक पुलिस बल मुस्तैद रही। यहां किसानों का कोई बड़ा संगठन न होने से कोई असर नहीं दिखा। जो तथाकथित किसान नेता हैं वह लोग घरों में घुसे रहे। जबकि 12 सितंबर को मौदहा में आए किसान नेता राकेश टिकैत को चेहरा दिखाने के लिए कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों के किसान नेता आगे आगे आए थे। संगठनों के आह्वान पर भारत बंद के समर्थन में किसानों के आगे न आने से प्रशासन ने राहत की सांस ली। बाजार प्रतिदिन की भांति खुला रहा। मौदहा संवाद के अनुसार किसान संगठनों के आह्वान पर सोमवार को भारत बंद का आंशिक असर देखा गया। वहीं कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों में इसका कोई असर नहीं दिखाई दिया।
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