गोंडा। जिला में पंचायत चुनाव 2020 के समय 160 नई पंचायतों का गठन हुआ था। अब 1054 के स्थान पर 1204 पंचायतें हो गई हैं। नव गठित पंचायतों में अभी कई सुविधाओं की व्यवस्था की जानी है। फिलहाल पहले चरण में इन नई पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है।
करीब 10 करोड़ रुपये का बजट इस पर खर्च होगा। इसके साथ ही समूहों का गठन कराने और फिर समूहों को ही शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी देने की तैयारी है, जिससे 1600 महिलाओं को सीधे रोजगार हासिल हो सकेगा।
पंचायत चुनाव के पहले अभियान चलाकर 1054 में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण शुरू हुआ था। जिसमें एक हजार से अधिक शौचालयों का संचालन भी विभाग ने शुरू कर दिया है। इसके साथ ही अन्य शौचालयों का निर्माण प्रगति पर बताया जा रहा है।
अब नव गठित 160 पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का खाका खींचा गया है। इसके साथ ही हर पंचायत में कम से कम एक महिला समूहों का गठन भी होगा। बताया जा रहा है कि नई पंचायतों में बीसी सखी का चयन भी हो रहा है और पंचायत सहायकों के चयन की कार्रवाई भी हो रही है। बताया जा रहा है कि नई पंचायतों में रोजगार सेवक न होने से पंचायत सहायकों की जरूरत भी है। अब तक जिले में एक हजार से अधिक पंचायत सहायकों का चयन भी हो सका है।
शहरों की तर्ज पर नई पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की तैयारी की गई है। स्वच्छ भारत मिशन से दो लाख 40 हजार रुपये, पंचायत की निधियों से एक लाख 20 हजार रुपये को जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही श्रमिकों का भुगतान मनरेगा से होगा। माना जा रहा है कि एक लाख रुपये के करीब बजट श्रम पर खर्च होगी। इस तरह पांच लाख के करीब का बजट खर्च होना है। शौचालयों के बजट पंचायतों में भूमि उपलब्धता के आधार पर घट बढ़ भी सकता है।
पंचायतों में सामुदायिक शौचालय के संचालन की जिम्मेदारी महिला समूहों को दी जाएगी। जिससे करीब 160 समूहों की 1600 महिलाओं को रोजगार हासिल होगा। इसके लिए समूहों को हर महीने नौ हजार रुपये मिलेंगे। जिसमें छह हजार रुपये महीने मानदेय के साथ ही तीन हजार रुपये शौचालयों की जरूरत की सामग्री व साफ सफाई के लिए मिलेंगे। फिलहाल पंचायतों को योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में गठित की गईं 160 नई पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत राज विभाग के साथ ही अन्य विभाग भी आगे आ रहे हैं। ग्राम्य विकास विभाग के साथ ही आजीविका मिशन व मनरेगा की योजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इसके अलावा तकनीकी विभागों की ओर से बैंकिंग सेवाओं का विस्तार होगा।