गोंडा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत के बाद भी फुटकर बाजारों में सब्जियों व खाद्य तेलों की बिक्री दर में कोई खास नरमी दिखाई नहीं पड़ रही। थोक मंडियों से सस्ती दर पर आलू टमाटर व अन्य सब्जियों को खरीद कर फुटकर बाजार में मनमानी कीमत पर बेचा जा रहा है।
फुटकर बाजार में आलू थोक मंडी के भाव से 12 रुपये और टमाटर 20 रुपये प्रति किग्रा महंगी दर पर बिक रहा है। इसके चलते ही पेट्रोल डीजल की कीमत में आयी कमी के बाद भी आम लोगों को महंगाई से राहत नहीं मिल पा रही। फुटकर कारोबारियों की इस मनमानी को रोकने में प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
मंडी में इस समय थोक में पुराना आलू 12 रुपये किलों मिल रहा है वहीं फुटकर बाजार में इसे 25 से 30 रुपये किलो की दर में बिक रहा है। यहीं स्थिति टमाटर की भी है। थोक में टमाटर 52 रुपये में तो फुटकर दुकानों पर 70 से 80 रुपये में बेचा जा रहा है।
थोक एवं फुटकर बिक्री के दामों में ऐसा ही कुछ अंतर अन्य हरी सब्जियों में भी देखने को मिल रहा है। खाद्य तेलों की आसमान छूती कीमतों पर लगाम कसने को सोया और पाम ऑयल से कस्टम ड्यूटी खत्म करने के बाद थोक बाजार में तो रिफाइंड आयल के दाम बीते 10 दिनों में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक गिरे लेकिन फुटकर बाजारों में दुकानदार अभी भी पुरानी दर पर ही ग्राहकों को इसे बेच रहे हैं ।
सब्जियों के फुटकर तथा मंडी के भावों में अधिक अंतर को लेकर गृहणियों ने जिला प्रशासन से दामों पर नियंत्रण बनाने की मांग की है। गृृहणी शशि त्रिपाठी ने कहा कि फुटकर दुकानदार थोक मंडी भाव 10 से 20 रुपये तक मंहगी सब्जियां बेच रहे हैं। इससे किचन का बिगड़ा बजट पटरी पर नहीं आ पा रहा है।
सत्यभामा मिश्रा ने कहा फुटकर व थोक के दामों में अधिक अंतर है। प्रशासन को सब्जियों के रेट तय करने चाहिए। साक्षी श्रीवास्तव ने कहा कि फुटकर दुुकानदार मनमाने रेट में सब्जियां बेच रहें हैं। इस मुनाफाखोरी पर कड़ाई से रोक लगना चाहिए।
अखिल भारतीय उद्योग व्यपार मंडल के जिला महामंत्री हामिद अली रायनी ने बताया कि पेट्राल डीजल की कीमत में कमी के बाद माल का भाड़ा भी कम हुआ है। इससे थोक मंडियों में तो कीमत में कमी आई है लेकिन फुटकर बाजार तक सामग्री पहुंचाने के एवज में अभी भी ज्यादा भाड़ा वसूला जा रहा है।
फुटकर व्यापारियों को इसे लेकर जागरूक बनने से ही फुटकर बिक्री की कीमत में कमी आएगी। व्यापार मंडल प्रभारी राहत अली का कहना कि मंडी में भाव भाड़ा पर निर्भर करता है। भाड़ा कम हुआ है इसलिए सब्जियों के दाम कम हुए हैं। मंडी के भाव तथा फुटकर दुकानदार के रेट में अंतर होता है, लेकिन फुटकर व्यापारियों को बहुत अधिक मुनाफा नहीं कमाना चाहिए।