गोंडा। जिले के लिए एक सुखद तश्वीर सामने आई है। अत्यधिक भूगर्भ जल दोहन से वाटर लेबल छह मीटर नीचे था वह भारी बरसात से एक मीटर पर मौजूद है। जल संरक्षण की तकनीक को लोगों ने नहीं अपनाया लेकिन प्रकृति इस संकट से उबारने का काम किया है।
यही कारण है कि नगर क्षेत्र में करीब 500 से अधिक घरों व काम िभवनों में बने बेसमेंट में बीते एक सप्ताह से पानी भरा है। इसकी पड़ताल भूगर्भ विभाग ने की तो पता चला कि जिले के कुछ क्षेत्रों में यह वाटर लेबर आधे मीटर पर ही उपलब्ध है।
जिले में भूगर्भ जल दोहन के लिए करीब तीन लाख पंपिंग सेट, 25 हजार इलेक्ट्रिक सिंचाई पंप, एक लाख टुल्लू पंप, 80 हजार इंडिया मार्का टू हैंडपंप, तीन लाख सामान्य छोटे हैंडपंप, शहरी क्षेत्र में एक दर्जन आरओ वाटर प्लांट, 60 वाहन धुलने के लिए लगे पंप सहित तमाम ओवरहेड टैंक हैं। प्रतिदिन लाखों गैलन पानी का दोहन हो रहा था।
बरसात के पहले जिले में भूगर्भ जल स्तर छह मीटर नीचे पहुंच गया था। हालांकि यह ग्रे जोन में था, लेकिन जिस तरह से दोहन हो रहा था उससे डार्क जोन में वाटर लेबल जाने की आशंका थी। इस बार बरसात में करीब 1200 मिलीमीटर बरसात के कारण वाटर लेबल बहुत ऊपर आ गया है।
एक सप्ताह पहले 40 घंटे हुई लगातार बारिश के कारण करीब 350 मिलीलीटर बारिश रिकार्ड की गई। बारिश से पानी सीधे जमीन में चला गया। इससे वाटर लेबल बहुत ऊपर आ गया है। भूगर्भ विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को हलधरमऊ ब्लाक क्षेत्र का भ्रमण किया तो वहां का वाटर लेबल .24 मीटर पर ही मिल गया। शहर में यह लेबल एक मीटर नीचे मिल गया।
जिले में जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग के लिए योजनाएं संचालित हैं। इसमें भवनों के निर्माण के साथ जल संरक्षण के लिए बरसात के पानी को रोकने की व्यवस्था करनी होती है। लेकिन एक प्रतिशत ही लोग ऐसे हैं जहां वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए जल संचयन की व्यवस्था है।