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राजापुर सूकरखेत में ही जन्मे थे गोस्वामी तुलसीदास

Fri, 21 Aug 2015 11:31 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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सूकरखेत इलाके में बना तुलसी धाम मंदिर, तुलसी थियेटर, तुलसी भवन, तुलसी कूप, तुलसी मानस, वाराह मंदिर, आत्माराम टेपरा, तुलसी के गुरु नारिहर दास जी का आश्रम व त्रिमुहानी घाट गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान को प्रमाणित करने को काफी है।
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खुद तुलसी दास जी ने विनय पत्रिका में लिखा है कि 'आलसी अभागे मोसे तें कृपालु पाले पोसे, राजा मोरे राजा राम, अवध सहरु’ चूंकि जिस वक्त उन्होंने यह पंक्तियां लिखी थी, उस वक्त गोंडा का कोई अस्तित्व नहीं था। परसपुर का राजापुर सूकरखेत अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा के अंतर्गत आता है।

तुलसी जन्म भूमि राजापुर से पांच किलोमीटर दक्षिण की तरफ गुरु नरहरिदास जी का आश्रम सूकर खेत में विद्यमान है। यहीं से छह किलोमीटर दूर बाराही देवी यानि उत्तरी भवानी मंदिर भी मौजूद है। इसका रामचरित मानस में भी उल्लेख हुआ है।
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उपेक्षित है जन्मस्थली
परसपुर (गोंडा)। गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म भूमि राजापुर उपेक्षित है। तुलसी थियेटर के सामने लोग अपने जानवरों को बांधते है। देख रेख के अभाव में तुलसी भवन जर्जर हो गया है। तुलसी घाट वा तुलसी सरोवर देख रेख के अभाव में एक बड़े तालाब का रूप ले चुका है। सरयू घाघरा के पवित्र संगम स्थल त्रिमुहानी घाट को जाने वाला मार्ग आज भी उपेक्षित है।

पिता के नाम भूमि आज भी अभिलेखों में दर्ज
परसपुर। तुलसी जन्म भूमि सूकर खेत विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने बताया कि अयोध्या से सटे गोंडा के राजापुर सूकर खेत में गोस्वामी तुलसीदास का जन्म श्रावण शुक्ल सप्तमी में संवत 1554 में हुआ था। तुलसीदास बचपन में ही पिता आत्माराम दुबे व मां हुलसी की छत्र छाया से वंचित हो गए थे। इनका पालन पोषण चुनिया नामक दासी ने किया। तुलसी राजापुर से 5 किलोमीटर दूर गुरु नरहरि दास के आश्रम में ही रहते थे। राजापुर सूकर खेत में आत्माराम के नाम से भूमि आज भी तहसील के अभिलेखों में दर्ज है।

घोषणा के बाद भी नहीं हुआ कायाकल्प
राजापुर सुकर खेत में 24 जुलाई 2014 को आयोजित चौपाल में जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय तथा 3 अगस्त 2014 को आयोजित कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री विनोद कुमार सिंह पंडित सिंह ने लोगों को आश्वासन दिया था कि तुलसी जन्मस्थली राजापुर सूकर खेत का अब नए सिरे से कायाकल्प किया जायेगा। एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद धरातल पर कोई भी कार्य दिखायी नहीं पड़ रहा है।

धरातल पर नहीं दिखा विकास कार्य
तुलसी पीठाशीश्वर डॉ. भगवदाचार्य कहते हैं कि तुलसी की जन्मभूमि के विकास में सरकार और प्रशासन ने खास रुचि नहीं ली है। गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली को विकसित किया जाए। लोकतंत्र रक्षक सेनानी श्रीराम सैनी कहते हैं कि इस स्थली के विकास के लिए आज तक आश्वासनों के अलावा धरातल पर कोई भी विकास का कार्य दिखायी नहीं पड़ रहा है। प्रमोद मिश्र बताते हैं कि पिछले वर्ष तुलसी जयंती के ही अवसर पर सरकार के नुमाइंदों ने यहां के विकास के लिए राजापुर में जिस बजट की घोषणा की थी उसका क्या हुआ कुछ पता नहीं है।राकेश रस्तोगी कहते हैं कि गोस्वामी तुलसी दास राष्ट्र के गौरव हैं। मानस की रचना कर न सिर्फ भारत बल्कि विश्व को एक संदेश दिया है। इसलिए उनके जन्म स्थान के विकास के लिए ठोस पहल होनी चाहिए।
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