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किसानों को 70 करोड़ का मरहम, फिर भी कायम है भुगतान का दर्द

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फोटो- 17- गोंडा में धानेपुर गन्ना क्रय केंद्र पर किसान। संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। गन्ना किसानों का दर्द कम होने का नाम नही ले रहा है। उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान चीनी मिल में फंसा हुआ है। हालांकि प्रशासनिक दबाव के बाद चीनी मिल ने बकाया डेढ़ सौ करोड़ में से 70 करोड़ का भुगतान कर कुछ मरहम लगाने की कोशिश जरूर की लेकिन अभी भी 90 करोड़ का अटका भुगतान किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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दिसंबर 2021 में चीनी मिल चलने पर किसानों ने बकाया भुगतान पाने के लिए घेराबंदी के साथ आंदोलन तेज किया था। पहली जनवरी को डीएम मार्कंडेय शाही ने इस मामले में दखल देते हुए मिल संचालकों से भुगतान की व्यवस्था शुरू कराई थी। चीनी मिल ने 20 दिनों में करीब 70 करोड़ का भुगतान करने बाद फिर से इसे रोक दिया। शुक्रवार को बजाज चीनी मिल कुन्दरखी ने गन्ना मूल्य का एकमुश्त 46.74 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके बाद भी किसानों को देय 90 करोड़ की राशि देना अभी बाकी है। किसान शिव कुमार कहते हैं कि किसानों के भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए। फिलहाल प्रशासन की ओर से भुगतान कराए जाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से वह संतुष्ट नजर आए।
गन्ना मूल्य भुगतान एक्ट से राह आसान
जिलाधिकारी ने बताया कि हाल ही में विधानसभा में गन्ना मूल्य भुगतान एक्ट पारित हुआ है। चीनी मिल पर शिकंजा कसा गया। इसके बाद बजाज चीनी मिल कुन्दरखी ने 20 दिन में 70 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया है। जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह ने बताया कि प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूस रेड्डी सीधे बजाज चीनी मिल से किसानों के हो रहे गन्ना मूल्य भुगतान की समीक्षा कर व्यक्तिगत तौर पर इस पर नजर बनाए हुए हैं।
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