Ghazipur News: युवक के भाई और पिता कभी किसी नेता तो किसी अधिकारी के यहां चक्कर लगा कर हार थार गए हैं। इधर पत्नी प्रियंका का भी रो रोकर बुरा हाल है l वह रोज ईश्वर से प्रार्थना कर पति को सकुशल घर वापस लौटने की मांग कर रही हैं। माता राम रती देवी दरवाजे पर आए लोगों से बस यही सवाल कर रही हैं, कि मेरा पुत्र कब घर आएगा।
गाजीपुर के सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के रस्तीपुर गांव निवासी प्रदीप कुशवाहा (36) ने जनवरी में थाईलैंड के एक रेस्टोरेंट में मैनेजर के पद पर नौकरी शुरू की थी। मई माह में उन्हें नई नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार ले जाकर उनका अपहरण कर लिया गया है। इसके बाद उससे एक कॉल सेंटर पर चरमपंथीगुट के लिए काम करने के लिए विवश किया जा रहा है।
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अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसा प्रदीप घर लौटने के लिए बेचैन है, लेकिन अपहरणकर्ताओं के आगे कुछ नहीं कर पा रहा है। इधर परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बड़े भाई राजकुमार, पत्नी प्रियंका मौर्या ने दोनों देशों के दूतावास और भारत सरकार और प्रदेश सरकार को मेल भेजकर प्रदीप को छुड़ाने की मांग की है। पिता शिवमूरत कुशवाहा ने बताया कि सबसे छोटा बेटा प्रदीप बीते आठ जनवरी को घर से ऑनलाइन इंटरव्यू देकर थाईलैंड के एक रेस्टोरेंट में मैनेजर पद पर तैनात हुआ। तीन महीने तक सब ठीक ठाक रहा।
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इस बीच उक्त रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में आ गया, तब प्रदीप ने दूसरी जगह नौकरी के लिए ऑनलाइन कोशिश की। इसी दौरान म्यांमार का एक व्यक्ति गाड़ी लेकर उसे लेने के लिए आया और उसे म्यांमार सीमा के तहत अप्रवासी नागरिकों के बीच रख दिया। वहां उसे कॉल सेंटर पर चरमपंथियों के लिए कार्य कराया जा रहा है, जिससे वह पूरी तरह विचलित है।
बीते 17 मई को उसके साथ काम करने वाले किसी सहयोगी के माध्यम से फोन करके उसने अपने भाई राजकुमार और पिता शिव मूरत को आप बीती बताई। घर वालों की घबराहट का अंदाजा लगाकर म्यांमार के चरमपंथी गुट से जुड़े अपहरणकर्ता उससे 8000 डालर की वसूली के लिए भी दबाव बना रहे हैं। ऐसे में किसी अनिष्ट के भय से पूरा परिवार विचलित है।
बोले अधिकारी
प्रदीप कुशवाहा के अपहरण की शिकायत लेकर परिजन आए थे। उन्हें वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। - पुष्पेंद्र सिंह पटेल, एसडीएम सैदपुर