क्षेत्र के दरौली-फुफुआंव-देवैथा संपर्क मार्ग अपनी दशा पर आंसू बहा रहा है। पांच किलोमीटर लंबा यह मार्ग पिछले कई वर्षों से बदहाल है। इस पर मार्ग पर गढ्ढे ही गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। घुटने भर हो चुके बड़े-बड़े गढ्ढे हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।
इस संपर्क मार्ग की दूरी कम होने से क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन करने में ज्यादा सुगमता रहती है लेकिन इस मार्ग के जर्जर हो जाने से लोगों को देवैथा जाने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। यह मार्ग धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो रहा है। बड़े-बड़े गढ्ढे हो जाने के कारण मामूली बारिश में इस पर पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। इससे तियरी, नेवादा, खड़ैचा संपर्क मार्ग भी जुड़ा है। यह कई गांवों में जाने के सबसे आसान एवं सुगम मार्गों में शामिल है। वजह यह रास्ता कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचाने में मदद करता है। कम दूरी वाला रास्ता अधिक खराब हो जाने के कारण राहगीरों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। जो व्यक्ति इस रास्ते पर आ जाता है उसको काफी फजीहत झेलनी पड़ती है। अति महत्वपूर्ण होने के बाद भी यह सड़क अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता से बाहर है। कई बार क्षेत्रीय लोग ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक से गुहार लगाई लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। देवैथा के पूर्व प्रधान जमालुद्दीन, सोहराब खान, रवि यादव, हवलदार यादव, अकरम खान, भुवनेश्वर, मेराज खान, माजिद, अबू बकर ने बताया कि कम दूरी का रास्ता होने के कारण लोग ज्यादा आवागमन करते हैं। यह ज्यादा दिनों से उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। इस पर कई हादसे भी हो चुके हैं। कई बार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को सड़क की दुर्दशा के बारे में जानकारी दी गई लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।