महान स्वाधीनता सेनानी पूर्व सांसद सरजू पांडेय की 32वीं पुण्यतिथि बुधवार को सरजू पांडेय पार्क में मनाई गई। उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वह त्याग, बलिदान, देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। अदम्य साहसी थे, निर्भीकता उनमें कूट-कूटकर भरी थी। उन्होंने 15 अगस्त 1942 को ही कासिमाबाद थाना पर तिरंगा फहरा दिया था। उनके नेतृत्व में हजारों लोगों ने भाग लिया था।
उन्होंने कहा कि वे आजादी के संघर्ष में ही कम्युनिस्ट बन गए। सामंती जुल्म एवं प्रत्येक प्रकार के अत्याचार, शोषण के खिलाफ आजीवन संघर्ष करते रहे। जनता ने उनका चार बार संसद सदस्य के रूप में चुनाव किया। लंबी कुर्बानी के बाद आजादी मिली लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्तों के सपनों का भारत नहीं बना। आज तो राजनीति से त्याग, बलिदान, देशभक्ति की भावना का लोप हो गया है। कहा कि ऐसी परिस्थिति में सिद्धांतनिष्ठ नेता किसानों, गरीबों, मजदूरों का राज कायम करने की ललक रखने वाले सच्चे देशभक्त सरजू पांडेय को याद कर प्रेरणा ग्रहण कर पुन: राजनीति को सही दिशा देने के लिए काम करना होगा। देश की संप्रभुता, आजादी, संविधान, लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखने का संकल्प आत्मसात करना होगा। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर सांसद अफजाल अंसारी, पूर्व विधायक अमिताभ अनिल दुबे, कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील राम, रविकांत राय, भाकपा के जिला सचिव अमेरिका सिंह यादव, सह सचिव रामअवध, ईश्वरलाल गुप्ता, पूर्व प्रमुख रामायण यादव, राजेंद्र राय, अ रविंद मिश्र, अशोक मिश्र, रामाश्रय यादव, फूलमैन, सुभाष, रामलाल, रामपरीखा यादव, बच्चेलाल, रुद्रदत्त तिवारी, भाकपा माले के जिला सचिव रामप्यारे राम, योगेंद्र भारती, जितेंद्र घोष, राम शुक्ला, इरशाद अहमद, बलिराम पटेल, शिवचरण दुबे, सावित्री देवी, अस्करी बेगम आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता श्यामप्रसाद एवं संचालन डा. रामबदन सिंह ने किया।