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काउंसिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्र

Sun, 21 Aug 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
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फर्जी प्रमाणपत्र - फोटो : Getty
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जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 386 सहायक शिक्षकों के पदों पर नियुक्त करने के लिए 16-17 अगस्त को डायट पर कराई गई काउंसिलिंग में दर्जनभर से अधिक महिला और पुरूष अभ्यर्थियों द्वारा स्नातक की फर्जी मार्कशीट और विकलांग प्रमाण पत्र लगाया है, यह आरोप कुछ अभ्यर्थियों ने लगाई है। उन्होंने इसकी शिकायत और सूची जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को सौंपी है।काउंसिलिंग के दौरान सही महिला-पुरूष अभ्यर्थियों ने फर्जी अंकपत्र में अंक बढ़ाकर और विकलांग का फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर काउंसिलिंग कराया है।
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ऐसे अभ्यर्थियों को चिह्नित किया गया था। काउंसिलिंग के समाप्त होने के बाद ऐसे फर्जी अभ्यर्थियों की सूची बनाकर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को सौंपा गया है। यह कार्य उन अभ्यर्थियों ने किया है जो सही होते हुए भी सूची से बाहर हैं। शिकायत करने वाले अभ्यथियों ने मांग की है कि फर्जी अभ्यर्थियों के समस्त मूल-प्रमाण पत्रों की जांच कराकर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई  की  जाए।
शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन अभ्यर्थी फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र और अंकपत्र लगाकर काउंसिलिंग कराया है।

उन लोगों ने बीटीसी में प्रवेश के समय जो स्नातक का प्रमाण-पत्र एवं अंकपत्र लगाया है,  काउंसिलिंग के दौरान उपलब्ध कराए गए प्रमाण-पत्रों से भिन्न हैं। उस समय के स्नातक अंकों का प्रतिशत कम है जबकि काउंसिलिंग में लगाए गए अंक पत्र ज्यादा प्रतिशत के हैं। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि तमाम ऐसे अभ्यर्थी जो काउंसिलिंग कराते मिले, जो दो-दो ऑनलाइन आवेदन भी किए थे और उस ऑनलाइन आवेदन में से एक विकलांग कोटे के तहत दर्ज कराए हैं। जबकि वह मूलत: विकलांग अभ्यर्थी नहीं हैं।
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उन्होंने एक महिला अभ्यर्थी को भी चिह्नित किया। वह टेट उर्त्तीण नहीं थी, लेकिन टेट उर्त्तीण  की फर्जी अंकपत्र लगाकर काउंसिलिंग करा रही थी।  उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी प्रमाण-पत्र और अंक पत्र लगाकर काउंसिलिंग कराने वालों की कट ऑफ मेरिट अधिक होने के कारण कई दर्जन सही अभ्यर्थियों को नियुक्ति पाने से वंचित होने का भय है। अभ्यर्थियों ने डीएम और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी से मांग की है कि आरोपित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों और उनके कट ऑफ मेरिट की जांच बीटीसी में प्रवेश के समय जारी की गई कट ऑफ मेरिट और उसमें लगाए गए प्रमाण-पत्रों से मिलान कर जांच कराया जाए। 

   इस संबंध में बेसिक शिक्षाधिकारी अशोक कुमार यादव ने बताया   कि जिन अभ्यर्थियों के संबंध में कोई भी शिकायत मिलेगी।  उनके प्रमाण-पत्रों की जांच करके ही सही पाए जाने पर नियुक्ति  पत्र दिया जाएगा नहीं तो उनके खिलाफ केस दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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