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जिले के 843 विद्यालयों में अब तक शुरू नहीं हो सका दिव्यांग शौचालयों का निर्माण

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जिले के परिषदीय विद्यालयों में दिव्यांग शौचालय का निर्माण कराने का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हो सका है। वजह इसको लेकर पंचायतें उदासीन बनी हुई है। नतीजतन अभी तक जिले के 2269 विद्यालयों में महज 700 परिषदीय विद्यालयों में दिव्यांगों के लिए शौचालय बनाए जा सके हैं।
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प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के साथ ही विद्यालयों का कायाकल्प करने के लिए सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं। जिले में 2269 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1468 प्राथमिक, 352 उच्च प्राथमिक तथा 449 कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें करीब तीन लाख 14 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इस मिशन के तहत अब इन विद्यालय में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों के हितों का विशेष ध्यान दिया गया है। दिव्यांग बच्चों को शौच के लिए असुविधा न हो, इसके लिए विद्यालय में विशेष शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन इस कार्य की हालत बेहद पतली है। अभी तक जिले के 700 विद्यालयों में ही इसका निर्माण पूरा हो सका है। इसमें सदर 39, बाराचवर में 31, भदौरा 36, भांवरकोल 28, बिरनो 91, देवकली 71, करंडा 11, कासिमाबाद 44, मनिहारी 49 और मरदह में 28 शौचालयों का निर्माण पूरा हुआ है। इसके अलावा मुहम्मदाबाद 41, रेवतीपुर 24, सादात 28, सैदपुर 46, जखनिया 49 और जमानिया ब्लॉक के 84 विद्यालयों में दिव्यांग शौचालयों का निर्माण पूरा हो गया है। जबकि 726 में निर्माण कार्य जारी है। हैरानी की बात तो यह है कि 843 में अभी तक निर्माण कार्य ही शुरू नहीं किया जा सका है। ऐसे में निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा कर पाना टेढ़ी खीर साबित होगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि दिव्यांग शौचालय का निर्माण पंचायतों को कराना है। इसको लेकर सीडीओ ने संबंधित ब्लाकों के बीडीओ, एडीओ पंचायतों को निर्देश जारी किया है। बताया कि कई पंचायतों की ओर से धनाभाव का हवाला दिया जा रहा जिस कारण यह समस्या आ रही है। इसका निर्माण पूरा होने को लेकर शासन गंभीर है।
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अधिकारी उदासीन बने
सुहवल। रेवतीपुर ब्लाक में 63 प्राथमिक, 18 उच्च प्राथमिक तथा 23 कंपोजिट सहित 104 विद्यालय हैं। अभी तक 104 में महज 24 विद्यालयों को इस योजना के तहत ही संतृप्त किया जा सका है। 25 विद्यालयों में शौचालय निर्माणाधीन है। शेष 55 स्कूलों में अभी तक निर्माण ही शुरू नहीं हो सका है। जबकि इन शौचालयों को पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा बीते आठ माह हो चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारी इसको लेकर उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
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