गाजीपुर। पति और पुत्र के दीर्घायु होने के लिए रखे जाने वाले छठ व्रत की तैयारी जिले भर में शुरू हो गई है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत की शुरुआत आठ नवंबर से नहाय-खाय के साथ होगी। 11 को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन किया जाएगा।
ऐसी मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से आरोग्य और वैभव की प्राप्ति होती है। खुशहाली और संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों छठ मइया का व्रत रखते हैं। आज से शुरू होने वाले चार दिवसीय पर्व को लेकर जिले में जोरशोर से तैयारी शुरू हो चुकी है। व्रती महिलाओं के घरों के लोग गंगाघाटों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। पोखरों और तालाबों के किनारे भी इसकी तैयारी की जा रही है। वेदी बनाने का काम जोरशोर के साथ किया जा रहा है। आठ नवंबर यानी सोमवार को छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होगी। व्रती पारंपरिक वेशभूषा पहनेंगे और परिजन कामकाज में उनका सहयोग करेंगे। पर्व के चार दिनों तक घरों में छठ मइया का गीत गूंजेगा। दूरदराज से गंगा घाटों पर आए लोग परिवारीजनों के साथ भजन-कीर्तन भी करेंगे। बाजारों में फलों की दुकानें सजने लगी है।
डाला छठ व्रत का विशेष प्रसाद ठेकुआ है। यह घी और गेहूं के आटे से बनाया जाता है। ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं को धोकर सुखाया जा रहा है। गेहूं सूखने के बाद इसकी बेहद सफाई के साथ पिसाई कराई जाएगी। कई घरों में गेहूं की धुलाई और पिसाई शुरू हो गई है।
छठ की पूजा के मद्देनजर गंगा घाटों, नदी तथा पोखरों के किनारे वेदी बनाने का काम शुरू हो गया है। लोग जलाशयों के किनारे घास-फूस साफ कर मिट्टी की बड़ी-बड़ी वेदी बना रहे हैं। शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर भी लोग वेदी बना रहे हैं। इसी प्रकार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब-पोखरों की साफ-सफाई कर युवक वेदी बनाने में जुटे हैं।