गाजीपुर। शहर की सीवर लाइन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पाइप लाइन बिछाने का करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। साथ ही जमुनादेवा में सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिसका निर्माण कार्य नवंबर में शुरू हो जाएगा। कार्यदायी संस्था की ओर से अगले डेढ़ साल में यह काम पूरा कर लिया जाएगा। सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट का पूरा नेटवर्क विकसित होने के बाद शहर का प्रतिदिन 31 मिलियन लीटर गंदा पानी शोधित किया जा सकेगा। जिसके साथ ही गंगा नदी को शहर के गंदे पानी से भी बचाया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से शोधित पानी गंगा की बजाय उसकी सहायक नदी बेसो में प्रवाहित किया जाएगा। जिसमें करीब 12 किमी प्रवाहित होने के बाद ही वह पानी गंगा तक पहुंचेगी। जिससे गंगा को प्रदूषण से बचाने में काफी मदद मिलेगी। इस परियोजना में जल निगम को सीवेज पाइप लाइन का जाल फैलाने के लिए कुल 135 करोड़ रुपये मिला है। जो दो चरणों में सीवेज पाइप लाइन का कार्य करा रही है। पहले चरण में 17.5 किलोमीटर और दूसरे चरण में 65.5 किलोमीटर के पाइप लाइन का काम होना है। जिसमें पहले चरण में अब तक करीब 16 किमी और दूसरे चरण में करीब 50 किमी का काम पूरा हो गया है। लेकिन इस काम में अभी देरी ही हुई है। दोनों चरणों का काम इस साल दिसंबर तक हो जाना था। जिसमें देरी की बड़ी वजह कोविड-19 को बताया जा रहा है। जल निगम के अनुसार अगले साल अक्तूबर-नवंबर तक पूरा काम पूरा हो जाएगा।
शहर के सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट का काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई डिवीजन वाराणसी की देखरेख में पीपीपी मॉडल में कराया जाएगा। इस परियोजना को विकसित करने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। इकाई की ओर से बताया गया कि प्लांट का काम पीपीपी मॉडल पर कराने के लिए कार्यदायी संस्था को चयनित कर लिया गया है। जो इस साल नवंबर में अपना निर्माण कार्य शुरू करेगी। डेढ़ साल में उसको प्लांट का काम पूरा करना है। साथ ही अगले 15 साल तक कार्यदायी संस्था के पास ही सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट की जिम्मेदारी होगी।पिछले महीने प्लांट के निर्माण से संबंधित सर्वे का काम पूरा कराया गया है। अभी प्रोजेक्ट के ड्राइंग का काम चल रहा है। नवंबर तक सभी वित्तीय और तकनीकी तैयारियां पूरा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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सीवर पाइप लाइन के पहले चरण में स्टीमर घाट से श्मशाम घाट तक का क्षेत्र है। जिसके लिए पंपिंग स्टेशन स्टीमर घाट में बन रहा है। दूसरे चरण में जलकल से लेकर सिटी स्टेशन को जोड़ा गया है। जिसके लिए पंपिंग स्टेशन जलकल परिसर में निर्मित है। इसके अलावा सिटी स्टेशन से आगे आदर्श बाजार तक के लिए अलग पाइप लाइन बिछाया जाएगा। जिसको सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट से जुड़े एक पंपिंग स्टेशन से जोड़ा जाएगा।
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सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट के लिए नमामि गंगे की तरफ से कार्यदायी संस्था का चयन हो गया है। जो पीपीपी मॉडल पर प्लांट का कार्य करेगा। कार्यदायी संस्था बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। नवंबर तक वित्तीय और तकनीकी व्यवस्था के साथ प्लांट का काम शुरू कराया जाएगा।
एस के रंजन, अधिशासी अभियंता गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई डिवीजन वाराणसी।