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14 पलंग की क्षमता वाले एसएनसीयू में 35 नवजात शिशुओं का चल रहा इलाज

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फिरोजाबाद। कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए बच्चों के इलाज के लिए जिले में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अत्याधुनिक मशीनें भी मंगाई जा रही हैं। मगर, कमजोर नवजात शिशुओं को पैदा होने के बाद से ही स्वस्थ्य होने के लिए संघर्ष कराना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में संचालित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) में इन दिनों बेड की कमी है। इस कारण एक बेड पर दो से तीन नवजातों का इलाज किया जा रहा है। 14 बेड के एसएनसीयू वार्ड में वर्तमान समय में 35 नवजात का इलाज चल रहा है। जगह न होने के कारण कई तीमारदार निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराने को मजबूर हैं।
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मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए तमाम सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं लेकिन नवजात शिशुओं को इलाज के लिए तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यदि नवजातों की संख्या बढ़ी तो अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।एसएनसीयू में भर्ती नवजात बच्चों को बारी-बारी से मां के पास दूध पिलाने के लिए भेज दिया जाता है। उस बच्चे का पलंग कुछ समय खाली होने पर दूसरे बच्चों को भर्ती कर दिया जाता है। यह क्रम दिन-रात चलता रहता है। एसएमएनसी में यह समस्या अक्सर बनी रहती है। चिकित्सकों का कहना है कि यहां बेडों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया है।
24 घंटे में सिर्फ एक ही डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक कमी पहले से ही है। डेंगू और वायरल के प्रकोप में तो बाहर से चिकित्सक बुलाने पड़े हैं। ऐसे में एसएनसीयू में तैनात जेआर और अन्य चिकित्सक की ड्यूटी हटाकर सौ शैय्या अस्पताल में लगा दी गई है। ऐसे में 24 घंटे में सिर्फ एक ही डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। स्टाफ नर्स पर ही बच्चों का दारोमदार हो जाता है।
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इस समय नवजात शिशुओं की संख्या एसएनसीयू में बढ़ गई है। इनके इलाज को लेकर अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह से गंभीर है। शिशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इंतजाम और करने के लिए पत्राचार करेंगे।
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डॉ. एलके गुप्ता, बाल रोग विभागध्यक्ष मेडिकल कॉलेज
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