दो तकनीक पर करेगा काम
आयुध उपस्कर निर्माणी के डिप्टी डायरेक्टर ओमवीर तोमर ने बताया कि यह पैराशूट हालो यानि हाई एल्टीट्यूड लो ओपनिंग और हाहो यानि (हाई एल्टीट्यूड हाई ओपनिंग) इन दोनों तकनीक में काम करने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल सेना अपने कॉम्बैट (लड़ाकू) मिशन में कर सकती है।यह पैराशूट आयताकार होते है। फिलहाल नाइन सेल में पैराशूट तैयार किए जाएंगे, इसके बाद इलेवन सेल में पैराशूट को तैयार किया जाएगा। ताकि तकनीकी को बढ़ाया जा सके।