फिरोजाबाद। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे पत्थर वाली गली में केला पकाने वाले प्लांट पर छापा मारा। यहां पर टैंक में भरे पानी में काफी संख्या में केले डूबे मिले। पानी में कार्बाइड सहित अन्य केमिकल केलों को पकाने के लिए मिलाए गए थे। टीम ने केला और केमिकल मिले पानी का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा है। सौ किलो केला मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। बिना लाइसेंस के प्लांट चलाने पर संचालक पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
जिला अभिहित अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया ने कि थाना दक्षिण क्षेत्र स्थित पत्थर वाली गली में राजू वारसी पुत्र सलीम वारसी का केले पकाने का प्लांट है। टीम को मौके पर एक टैंक में तीन हजार लीटर पानी के साथ फिटकरी और अन्य प्रतिबंधित केमिकल का घोल मिला। इसमें केलो को डूबोकर रखा गया था। प्लांट संचालक पर खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस भी नहीं था।
टीम ने सौ किलो केले मौके से नष्ट करवाए। केला और पानी में मिलाए गए केमिकल का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। प्लांट बिना लाइसेंस के चल रहा था। उन्होंने बताया कि प्लांट संचालक पर मुकदमा दायर किया जाएगा। कार्रवाई के दौरान मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी बीएस कुशवाह, खाद्य निरीक्षक अरुण मिश्रा, अनिल कुमार भी मौजूद थे। उधर विभाग की टीम ने थाना उत्तर क्षेत्र स्थिति एक रिटेल मार्ट से किशमिश का नमूना लिया है। जलेसर रोड स्थित किराना स्टोर से मुनक्का का नमूना लिया है।
केला पकाने का यह है तरीका
जिला अभिहित अधिकारी डा. सुधीर कुमार ने बताया कि चैंबर में केले को रखकर मानक के अनुसार इथाइलीन गैस छोड़ी जाती है। इथाइलीन गैस भी हार्मोन है। जो पौधों में पाया जाता है। इस प्रक्रिया में केला तीन दिन में पकता है। इस तरह से पकाया गया केला नुकसान नहीं करता है।
इस तरह एक दिन में ही पक जाता है केला
जिला अभिहित अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि पानी में कार्बाइड और अन्य खतरनाक केमिकल डालकर मिश्रण में केले को डूबा दिया था। इससे केला एक दिन में ही पक जाता है। लेकिन यह सेहत के लिए खतरनाक बन जाता है। केमिकल का असर छिलके के अंदर तक जाता है, जो नुकसान करता है।
कार्बाइड और केमिकल के सीधे संपर्क में आने से फल एक प्रकार से जहरीला हो जाता है। लगातार सेवन से यह लीवर और पेट की संबंधित बीमारियों को नुकसान करता है। बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है। ऐसे में केमिकल जब पेट में जाता है तो और भी स्थिति खतरनाक हो जाती है। कार्बाइड और खतरनाक केमिकल से पका फल लगातार खाने से कैंसर जैसी बीमारी हो जाती हैं। डा. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन
- केमिकल में केला डूबोकर रखा जाता है। इसलिए केला बीच में तो पका नजर आता है। लेकिन ऊपर और नीचे की ओर कच्चा रहता है।
- केला यदि बाहर से पका नजर आ रहा है और अंदर से कच्चा है तो वह निश्चित रूप से कार्बाइड से पकाया गया है।
केला पकाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले टैंक को देखते हुए खाद्य विभाग के अधिकारी।- फोटो : FIROZABAD