बहुआ (फतेहपुर)। सच्चा प्रेम करने वाले काला, गोरा या शारीरिक अक्षमता नहीं देखते। सारी बंदिशें तोड़कर एक होने का जुनून रखते हैं। ऐसी ही एक प्रेम कहानी महना निवासी शिवमिलन रैदास की है। उसे बोलने में अक्षम (मूक) संतोषी से प्यार हो गया। ना-नुकुर के बाद परिजन भी मान गए। दोनों ने थवईश्वरधाम में दोनों ने जीवनभर के लिए एक-दूजे के हाथ थाम लिया।
ललौली थानाक्षेत्र के महना गांव के रीतम रैदास का पुत्र शिवमिलन एक ईंट-भट्ठे में मजदूरी करता है। दो साल पहले शिव मिलन अपनी मौसी के यहां शादी में गया था। वहां संतोषी नाम की लड़की से उसकी मुलाकात हुई। पहली मुलाकात ही इतनी प्रभावी रही कि उसने शादी करने की ठान ली। लड़की बांदा के चिल्ला थाना क्षेत्र के रामआसरे की पुत्री है। शिवमिलन को बाद में पता चला कि संतोषी बोल नहीं सकती। वह बचपन से बोल नहीं सकती है। शिवमिलन भी दिल के आगे मजबूर हो गया। परिवारिक बंदिशें तो आईं, लेकिन शिवमिलन की जिद के आगे कोई टिक न सका।
प्रेमी-प्रेमिका की जिद के आगे दोनों परिवार के लोग शादी को राजी हो गए। शनिवार को क्षेत्र के सिद्धपीठ थवईश्वर धाम में शादी हुई, लेकिन संतोषी के पिता रामआसरे शादी में शामिल नहीं हुए। शादी के समय शिवमिलन की ओर से पिता रीतम रैदास, छोटा भाई नीरज कुमार, बहन सावित्री देवी, गायत्री देवी, गुड़िया देवी व अन्य रिश्तेदार रहे। संतोषी की ओर से उसकी मां राजकली, मौसी रामकुमारी, भाई करन, अर्जुन, बहन प्रीति व पूजा शामिल हुए।