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जिंदा को मृत दिखाने में सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर, दरोगा समेत छह फंसे

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फर्रुखाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सीबीसीआईडी लखनऊ मुख्यालय के इंस्पेक्टर, आजमगढ़ के थाना सिजाती में तैनात दरोगा समेत छह लोगों के खिलाफ मेरापुर थानाध्यक्ष को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया है। इंस्पेक्टर व दरोगा ने मेरापुर थाने में तैनाती के दौरान पुत्री के अपहरण की रिपोर्ट लिखाने वाले पिता को ही पुत्री का हत्यारोपी बना दिया था। वह पुत्री चार साल बाद जिंदा मिल गई।
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मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव देवसनी निवासी लालाराम ने गांव के संतोष कुमार, उनकी पत्नी संतोषा देवी, कायमगंज क्षेत्र के गांव मदारपुर निवासी ओंकार, मैनपुरी के भोगांव थाना क्षेत्र के गांव निजामपुर निवासी अजब सिंह, आजमगढ़ जिले के सिजाती थाने में तैनात दरोगा मोहम्मद आशिफ, सीबीसीआईडी विकास खंड गोमती नगर मुख्यालय लखनऊ में तैनात इंस्पेक्टर सुशील कुमार के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दायर की थी।
इसमें लालाराम ने बताया कि वर्ष 2016 में ओंकार, अजब सिंह, संतोष व संतोषा के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर पुत्री सोनी के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना उस समय मेरापुर थाने में तैनात दरोगा मोहम्मद आशिफ और इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने की थी। आरोप है कि इंस्पेक्टर व दरोगा ने आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए सोनी की हत्या होना दिखा दिया। शव बरामद किए बिना हत्या में पिता लालाराम को आरोपी बनाकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। लालाराम को जेल भी भेज दिया गया। लालराम तीन साल जेल में रहा।
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साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। 26 मई 2020 को सोनी ने खुद के जिंदा होने का पुलिस अधीक्षक को हलफनामा दिया। जानकारी होने पर लालाराम ने पुत्री को खोज लिया। उन्होंने पुत्री की हत्या में फंसाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए 24 जून 2020 को एसपी को प्रार्थनापत्र दिया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
इस पर लालाराम ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की। सुनवाई के दौरान 17 अगस्त 2021 को लालाराम ने पुत्री सोनी को कोर्ट में पेश किया। सीजेएम ने अर्जी पर सुनवाई के बाद बुधवार को मेरापुर थानाध्यक्ष को आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तीन दिन में रिपोर्ट की प्रति कोर्ट में भेजने का आदेश दिया है। आरोपी सुशील कुमार इंस्पेक्टर हैं, इस एसपी को एसपी को इंस्पेक्टर रैंक से ऊपर के अधिकारी से विवेचना कराने का आदेश दिया है।
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