फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घेराबंदी के बाद बुलाया आसपास जिलों का फोर्स

विज्ञापन
विज्ञापन
संकिसा (फर्रुखाबाद)। बिसारी देवी मंदिर में तोड़फोड़ की सूचना पर सनातन धर्मी इस कदर गुस्साए कि आसपास के सभी गांवों के रास्ते बंद कर दिए गए। टीला परिसर में फंसे लोगों को निकालने में अफसर नाकाम रहे, तो आसपास जिलों सीमावर्ती सीओ और थाना पुलिस बुला ली गई। हालांकि उनके पहुंचने से पहले मामला निपटा लिया गया था।
विज्ञापन

विवादित स्थल पर फंसे हजारों बौद्ध अनुयायियों को संकिसा गांव के रास्ते निकालने के सभी प्रयास विफल हो गए, तो अफसरों ने छिछोनापुर की ओर से निकालने का प्रयास किया। जब वहां भी महिला-पुरुष लामबंद दिखे, तो प्रशासन असहाय हो गया। हालांकि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग काली नदी के पुल पार करके चले गए। तमाम बौद्ध अनुयायियों की कारें, ट्रैक्टर ट्राली, बाइकें मेला स्थल के आसपास खड़ी थीं, लिहाजा उन्हें यहीं वापस आना था।
ऐसे में प्रशासनिक अफसरों की सूचना पर कन्नौज के छिबरामऊ सीओ शिवकुमार सिंह थापा, तालग्राम थानाध्यक्ष, अलीगंज सीओ व नयागांव थानाध्यक्ष, भोगांव थाना पुलिस व सीओ के अलावा जिले के मऊदरवाजा, जहानगंज, कायमगंज, शमसाबाद, मोहम्मदाबाद आदि थानों की पुलिस भी बुला ली गई। हालांकि गैर जनपद के पुलिस अधिकारी जब तक पहुंचे, तब तक मामला शांत हो चुका था।
विज्ञापन

उपद्रव के बाद ही संकिसा तिराहा और काली नदी के दूसरी तरफ मैनपुरी जिले की सीमा में वाहनों को रोक दिया गया। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मामला शांत होने के बाद तीन बजे यातायात सुचारु किया गया। तब लोगों ने राहत की सांस ली।
मां बिसारी देवी मंदिर पर विवाद के बाद लोग इस कदर गुस्सा गए कि महिलाएं भी घरों से डंडे लेकर मुख्यमार्ग पर डट गईं। पु्िलस और प्रशासनिक अफसरों के निकलने के दौरान भी महिलाएं एक कदम पीछे हटने को तैयार नहीं थीं। यह स्थित छिछौनापुर व सींगनपुर में भी दिखी।
विवाद के बाद स्थानयी लोग छिपते रहे। उनका कहना था कि कुछ बाहरी नेता इन उपद्रवियों को लेकर आए थे। हम लोगों को तो यहीं रहना है। मगर बाहरी लोगों ने जो किया वह बेहद शर्मनाक है। इससे स्थानीय लोगों की साख को बट्टा लगा है।
मंदिर पर तोड़फोड़ का वीडियो वायरल होते ही आसपास करीब 10 गांवों के सैकड़ों सनातन धर्मी युवा भी संकिसा पहुंच गए। सभी में आक्रोश देख प्रशासन भी बचाव मुद्रा में दिखाई दिया।
विवाद के दौरान आसपास गांवों में भी महिलाएं व बच्चे अपनी छतों पर तमाशबीन बने रहे। पुरुष खेतोें में खड़ी फसलों के अंदर बैठे रहे। जैसे ही पुलिस खेतों की तरफ आती, तो वह फसलों में चले जाते और पुलिस के पीछे हटते ही डंडे लेकर बाहर आ जाते थे।
फर्रुखाबाद। धम्म यात्रा में भीड़ के सापेक्ष पुलिस व पीएसी की तैनाती कम थी और एलआईयू भी अधिकारियों को सटीक सूचना नहीं दे पाई। पुलिस अधिकारियों की चूक से टकराव की नौबत बनी।
मेरापुर एसओ देवी प्रसाद गौतम से पुराने रोस्टर के अनुसार एएसपी अजय प्रताप से फोर्स मांगी थी। एएसपी ने धम्म यात्रा को संपन्न कराने की जिम्मेदारी सीओ कायमगंज सोहराब आलम को दिए थे। एसओ को स्तूप के आसपास की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी थी।
धम्म यात्रा में मोहम्मदाबाद कोतवाल, नवाबगंज एसओ, महिला थाने की एसओ, सात दरोगा, पांच दीवान, 17 सिपाही, आठ महिला सिपाही, एक फायर टैंकर व डेढ़ सेक्शन पीएसी लगाने के आदेश थे। किंतु धम्म यात्रा से पहले स्तूप की पूजा के दौरान पीएसी के जवान व कुुछ फोर्स ही मौजूद था। इसी का फायदा उठाकर भीड़ ने स्तूप पर चढ़कर कलश तोड़कर मंदिर पर बौद्ध धर्म का झंडा लगा दिया। एलआईयू के जवान भी इस साजिश को नहीं भाप पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें