फर्रुखाबाद। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब मनरेगा का काम देखेंगी। 40 श्रमिकों पर एक महिला मेट का चयन किया जाएगा। महिला मेट के चयन के लिए खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपकर सूची मांगी गई है।
सरकार ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की अब ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों में भी भूमिका होगी। मनरेगा के कार्यों को देखने के लिए समूह की महिलाओं का मेट पद पर चयन किया जाएगा। वह अपने गांव व मोहल्ले में मनरेगा से होने वाले कार्य देखेंगी। 20 से 40 मनरेगा श्रमिकों पर एक महिला मेट का चयन होगा। महिला मेट को कुशल श्रमिक के बराबर प्रतिदिन के हिसाब से करीब 350 रुपये पारिश्रमिक दिया जाएगा। इससे समूह की महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी सहयोगी साबित होंगी।
इस आधार पर होगा चयन
शासन से जारी आदेश के अनुसार 20 से 40 श्रमिकों पर उसी ग्राम पंचायत की एक महिला मेट चयनित होगी। कम से कम 6 माह पहले समूह का गठन होने के साथ साप्ताहिक बैठक में 80 प्रतिशत भागीदारी हो। समूह की तीन हजार से अधिक बचत हो और ऋण वापसी की दर 60 प्रतिशत से अधिक हो। डीसी एनआरएलएम योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि महिला मेट का चयन करने के लिए खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। तीन दिन में चयन कर रिपोर्ट मांगी गई है।