कुर्की की कार्रवाई के बीच शमीम हत्याकांड में बसपा नेता अनुपम दुबे कोर्ट में समर्पण कर जेल चला गया। इसपर 25 वर्ष पहले हुई जीआरपी के इंस्पेक्टर की हत्या में उसके घर की कुर्की की कार्रवाई को रोक दिया गया। बसपा नेता पर जीआरपी ने 25 हजार का इनाम भी घोषित किया हुआ था।
जनपद मेरठ (अब बागपत) थाना अमीनगर सराय के लाहौर सराय गांव निवासी इंस्पेक्टर रामनिवास यादव की कानपुर के रावतपुर स्टेशन पर ट्रेन की बोगी में 14 मई 1996 को हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे के खिलाफ सात जुलाई को कानपुर की अदालत ने कुर्की की कार्रवाई के आदेश दिए थे।
इस पर मंगलवार को आगरा मंडल के जीआरपी के सीओ हरीश चंद्रा जिले की पुलिस के साथ उनके आवास पर कुर्की की कार्रवाई तामील कराने पहुंचे थे। जीआरपी ने कुर्की नोटिस चस्पा कर मुनादी कराई थी। बसपा नेता संयुक्त परिवार में रहते हैं। रात तक पुलिस ने उनकी संपत्ति की सूची बनाई थी।
रात को उनके आवास पर पुलिस तैनात कर दी गई थी। बुधवार सुबह दस बजे जीआरपी सीओ एक ट्रक पीएसी व फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल के साथ बसपा नेता के घर पर कुर्की के लिए फिर पहुंच गए। पुलिस कार्रवाई ने शुरू कर दी थी। तभी लगभग 12 बजे बसपा नेता ने सीजेएम कोर्ट में 1995 के शमीम हत्याकांड मामले में समर्पण कर दिया।
जानकारी मिलते ही एसओजी प्रभारी जेपी शर्मा, कोतवाल जेपी पाल के साथ सीजेएम कोर्ट पहुंच गए। सीजेएम ने बसपा नेता को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में बसपा नेता को जिला जेल में दाखिल करा दिया। तभी उनके समर्थक भी जेल के गेट पर एकत्र हो गए। पुलिस ने समर्थकों को जेल गेट से किसी तरह हटाया।
वर्चुअल पत्रकार वार्ता में एसपी जीआरपी अगरा मुश्ताक अहमद ने बताया कि इंस्पेक्टर हत्याकांड में वांछित अनुपम दुबे पर 25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था। जेल जाने से पहले बसपा नेता ने बताया कि जीआरपी ने उन पर जो 41 मुकदमों का रिकार्ड पेश किया है, वह गलत है। अब उन पर केवल तीन मुकदमे ही विचाराधीन हैं।