सरयू की लहरों का उफान मंगलवार सुबह थम गया, लेकिन शाम तक मामूली जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेज हो गई है। कटान होने से सदर और रुदौली तहसील क्षेत्र के दो गांवों का वजूद मिटने की ओर है। दोनों गांव खाली हो गए हैं। लोग बंधे व सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
अयोध्या स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के मुताबिक सरयू का खतरा बिंदु 92.730 मीटर है। सोमवार दोपहर से मंगलवार सुबह आठ बजे तक सरयू का जलस्तर 92.220 मीटर पर स्थिर रहा। इसके बाद जलस्तर घटना शुरू हुआ और शाम चार बजे तक 92.190 मीटर पर पहुंच गया। लेकिन उफान थमने के साथ जैसे ही जलस्तर कम हुआ, वैसे ही लहरों ने तटवर्ती इलाकों में कटान तेज कर दी है।
कटान के चलते सदर तहसील के पूरा बाजार ब्लॉक अंतर्गत पिपरी संग्राम गांव का वजूद खतरे में आ गया है। पिछली बाढ़ में मूढ़ाडीहा और पूरे चेतन गांव पूरी तरह समाप्त हो गए थे। पिपरी संग्राम गांव का भी 30 फीसदी हिस्सा बचा था, जो अब तेजी से कट रहा है। गांव के भगवती निषाद, प्रेमादेवी, राममिलन निषाद, पारस नाथ यादव, धर्मराज, जगदीश निषाद, राम वचन निषाद व ध्रुवकुमार का घर लहरों की चपेट में आकर कट रहा है।
इन लोगों का कहना है कि घर से जो कुछ सामान निकाल सकते थे, उसे लेकर अब बंधे पर आ गए हैं। यहां के अन्य ग्रामीणों ने भी घर छोड़ दिया है। कटान तेज होने से लोगों में दहशत है। यही हाल रुदौली तहसील क्षेत्र के महंगू का पुरवा का है। यहां के अखंड प्रताप सिंह और गोनई यादव का घर धारा में तेजी से समा रहा है। लोग गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर आ गए हैं।
तटीय क्षेत्रों के दर्जन भर गांवों के लोग परिवार व मवेशियों के साथ बंधे व ऊंचे क्षेत्रों में सुरक्षित ठौर बना रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी बाढ़ की संभावना व कटान के मद्देनजर तीन तहसीलों सदर, रुदौली और सोहावल में राजस्व अधिकारियों व सिंचाई विभाग को अलर्ट जारी कर दिया है। सदर, सोहावल और रुदौली एसडीएम कछार में बसे गांवों में कटान के साथ ही बाढ़ पर नजर रखे हुए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व जयशंकर दुबे ने कहा कि पलायन करने वाले ग्रामीणों के लिए एसडीएम स्तर से व्यवस्था के निर्देश दे दिए गए हैं।
सोहावल के उप जिलाधिकारी हरिशंकर लाल शुक्ला ने मंगलवार को कई बाढ़ क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने रामनगर धौरहरा, महोली, सैदपुर, हाजीपुर, कलाफरपुर, रग्घूपुर, सिंहोरा, मांधाता का पुरवा, मंगलसी आदि गांवों का निरीक्षण कर लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने बताया कि नदी अभी खतरे के निशान से नीचे है। प्रशासन द्वारा मिलने वाली सभी राहत सामग्री की व्यवस्था शीघ्र करा दी जाएगी। उधर, बाढ़ व कटान से गांव वाले मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।