इटावा। शहर और ग्रामीण इलाकों में डेंगू व वायरल बुखार का प्रकोप कम नहीं हुआ है। शनिवार को बुखार से भाजपा नेता समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, दो अक्तूबर को गांधी जयंती पर अवकाश होने के चलते जिला अस्पताल और सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओपीडी बंद रही, लेकिन सरकारी अस्पतालों के आकस्मिक विभाग और निजी अस्पतालों में वायरल बुखार और डेंगू के लक्षण वाले मरीजों का उपचार के लिए आने का सिलसिला चलता रहा।
स्वास्थ्य विभाग वायरल बुखार और डेंगू नियंत्रण में होने का दावा भले ही कर रहा हो, लेकिन अस्पतालों में मरीजों की भीड़ इस दावे की पोल खोल रही है। बढ़पुरा ब्लॉक नगला जगे गांव निवासी राजेंद्र राजपूत (46) भाजपा के इकदिल मंडल अध्यक्ष थे।
परिजनों ने बताया कि राजेंद्र को कई दिनों से बुखार आ रहा था। उनका अस्पताल में उपचार चल रहा था। शुक्रवार को हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी रेफर कर दिया। वहां शनिवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई।
जसवंतनगर संवाद के मुताबिक, बुखार के कहर ने क्षेत्र के गढ़ी जालिम गांव निवासी रामवरन सिंह के बेटे राहुल (28) की जान ले ली। राहुल कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। वह इटावा शहर के एक निजी भर्ती था।
शुक्रवार की रात हालत बिगड़ने पर परिजन ग्वालियर एक अस्पताल में इलाज के लिए लेकर जा रहा थे, लेकिन रास्ते में मौत हो गई। इस गांव में बुखार से यह तीसरी मौत है। गांव में बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं।
इसी क्षेत्र के कोकावली गांव निवासी बेताल सिंह राजपूत की बेटी शिवानी (19) को दो दिन बुखार आया था। शुक्रवार को उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उसके एक निजी चिकित्सक को दिखाया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
देर रात शिवानी ने घर पर ही दम तोड़ दिया। यह मामले वो है, जो सामने आए हैं, लेकिन कई और लोगों की बुखार से जिले में मौत होने की खबर है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डेंगू से अभी तक जिले में कोई मौत नहीं हुई है।
डेंगू और वायरल बुखार के मरीज जरूर सरकारी व निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में उपचार के लिए आ रहे हैं।
राजेंद्र राजपूत को शुक्रवार को गंभीर हालत में मेडिकल यूनिवर्सिटी लाया गया था। राजेंद्र से सेप्टीसेमिया, निमोनिया हुआ था। उनके मल्टी आर्गन फेल हो गए थे। यही उनकी मौत की वजह बना।
-डॉ. आदेश कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी में पहुंचे बुखार के 180, डेंगू के 19 मरीज
गांधी जयंती का अवकाश होने के चलते शनिवार को मेडिकल यूनिवर्सिटी के आकस्मिक विभाग में 316 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 180 लोग बुखार से पीड़ित रहे। शनिवार को यहां डेंगू के 19 नए मरीजों को भर्ती किया गया।
डेंगू वार्ड में भर्ती 56 मरीजों में आठ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मेडिकल यूनिवर्सिटी में आने वाले बुखार और डेंगू के मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में 21 डेंगू पीड़ित
जिला अस्पताल में बुखार के 271 मरीज आए। इनमें 53 मरीजों डेंगू जांच कराई गई, जिसमें 21 को डेंगू की पुष्टि हुई। इसी तरह सीएचसी व पीएचसी में 513 बुखार के मरीज आए। 244 की डेंगू की जांच कराई गई, तो 11 की रिपोर्ट पॉजिटिव रही।
निजी अस्पतालों से 33 मरीजों सैंपल जांच के लिए भेजे गए। 27 नए मरीजों की सैंपल डेंगू की जांच के लिए सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजे गए। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में 120 बुखार के मरीज भर्ती हैं।
इनमें डेंगू के मरीज भी हैं। वहीं जिले भर से अस्पतालों में भर्ती 48 मरीजों को शनिवार को छुट्टी दे दी गई। यह आंकड़ा सीएमओ कार्यालय की तरफ से जारी किया गया है।
बेरीखेड़ा और मड़ौली में बीमारी का प्रकोप
बकेवर। धान की सिंचाई के लिए माइनरों और रजवाहों से आया पानी बेरीखेड़ा और मड़ौली गांव से सटे खेतों में भरा हुआ है। कई दिनों से पानी भरे होने से गांवों में बीमारियां बढ़ रही हैं। एंटी लार्वा की दवाओं का छिड़काव भी अभी तक नहीं किया गया।
महेवा ब्लाक के बेरीखेड़ा, मड़ौली दोनों गांवों में काफी लोग बीमार हैं। एक माह से दोनों गांवों में बीमारियां फैली हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम में पहुंचे डॉक्टर विवेक यादव, डॉ. शिवानी, डॉ मिथिलेश सिंह ने बीमारियों के फैलने के पीछे साफ सफाई की कमी और जलभराव को कारण बताया है।
बेरीखेड़ा के पंछीलाल, महावीर सिंह ने बताया कि गांव में दवा का छिड़काव नहीं कराया गया। यही नहीं गांव में सफाई कर्मी भी सफाई करने नही आता है। गांव के लोग खुद ही रास्तों नालियों की सफाई करते हैं।
मड़ौली गांव के पास भी खेतों में जलभराव है। मड़ौली के अवनीश बताते हैं कि गांव में किसी प्रकार की दवा एंटी लार्वा का कोई छिड़काव नहीं कराया गया। गांव में सौ से अधिक लोग बीमार है। बेरीखेड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान सुशील यादव ने बताया कि छिड़काव एक दो दिन में कराया जाएगा।