इटावा। शहर से सटे राहतपुरा गांव में बनी 500 गोवंशों की क्षमता वाली कान्हा गोशाला आधी-अधूरी तैयारियों के साथ शुरू कर दी है। नगर पालिका प्रशासन ने गोशाला में तीन कर्मचारियों की तैनाती कर वहां 145 गोवंशों को पहुंचा दिया है।
बृहस्पतिवार को भी आवारा गोवंशों को कैटल कैचिंग दस्ते पकड़कर गोशाला पहुंचाया। इस गोशाला का निर्माण ढाई साल में भी पूरा नहीं हो सका है। बजट के अभाव में भुगतान न होने से ठेकेदार ने आठ महीने पहले काम बंद कर दिया था।
इससे गोशाला का निर्माण अधूरा पड़ा है। न तो गोशाला में बिजली की व्यवस्था हुई और न ही पानी की। ऐसे में गोवंश ही नहीं, बल्कि कर्मचारी भी परेशान हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश भर में कान्हा गोशालाओं का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत राहतपुरा गांव में ढाई साल पहले लगभग 1.65 करोड़ रुपये की लागत से 500 गोवंशों की क्षमता वाली कान्हा गोशाला का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
600 वर्ग मीटर में बनने वाली कान्हा गोशाला के लिए नगर पालिका परिषद ने नगर विकास विभाग को जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा था। इस पर नगर विकास विभाग ने गोशाला के लिए 82.95 लाख रुपये जारी किए थे।
इसके बाद ठेकेदार बंटी ने गोशाला का निर्माण कार्य शुरू कराया। ठेकेदार ने गोशाला निर्माण का 75 फीसदी से ज्यादा काम पूरा करा दिया।
इस बीच ठेकेदार ने भुगतान के लिए कई बार संबंधित अफसरों से संपर्क किया, लेकिन हर बार अफसरों ने बजट की दूसरी किस्त जारी न होने पर असमर्थता जताई। इससे निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है।
आठ महीने से निर्माण कार्य बंद
भुगतान न होने पर ठेकेदार ने आठ महीने पहले गोशाला निर्माण का काम बंद कर दिया। तब से मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट कान्हा गोशाला निर्माण कार्य अटका पड़ा है।
अभी गोशाला में सड़क और बायोगैस प्लांट, बिजली व पानी की लाइन डाले जाने समेत कई काम बाकी है। उधर, गोशाला का निर्माण पूरा न होने की वजह से छुट्टा गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं।
महंगाई से बढ़ गई गोशाला की लागत
जिस समय कान्हा गोशाला के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस वक्त लागत 1.65 करोड़ रुपये थी। अब बिल्डिंग मैटेरियल, मजदूरी और परिवहन भाड़ा महंगा हो गया है।
नगर पालिका के अधिकारियों की मानें तो रिवाइज एस्टीमेट में गोशाला के निर्माण की कीमत 1.65 करोड़ से बढ़कर करीब ढाई करोड़ पहुंच गई है। जल्द ही रिवाइज एस्टीमेट के साथ फाइल शासन को भेजने की तैयारी है।
ढाई साल पहले शुरू हुआ था निर्माण
ईओ विनय कुमार मणि तिवारी के मुताबिक, कान्हा गोशाला का निर्माण ढाई साल पहले शुरू हुआ था। टिन शेड, बाउंड्री, गोवंशों के लिए चरहई, कर्मचारी आवास, भूसा स्टोर समेत 75 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।
शासन से जारी बजट की पहली किस्त का 82.95 लाख रुपया खर्च हो चुका है। बाकी 83 लाख का बजट जारी नहीं हुआ है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलते निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।
फिलहाल वहां पर 145 गोवंशों को रखा गया है और गोवंशों को सड़कों से पकड़कर गोशाला पहुंचाने का काम चल रहा है। उधर, आवारा गोवंशों की संख्या बढ़ने से किसान व आम लोग परेशान हैं।
गोवंश किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। साथ ही आवारा गोवंशों के चलते लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं।
गोवंशों के भूसे के लिए बजट नहीं
राहतपुरा में बनी कान्हा गोशाला की देखभाल की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद प्रशासन को सौंपी गई है। पालिका के एक अफसर की मानें तो गोशाला तो बना दी गई, लेकिन वहां रखे जाने वाले गोवंशों के लिए कोई बजट नहीं दिया गया है।
जैसा ग्रामीणों क्षेत्रों की गोशाला के लिए प्रति गोवंश बजट दिया जाता है। कान्हा गोशाला में नगर पालिका को गोवंशों के लिए चारा व भूसा का इंतजाम अपने स्तर से करना है। अफसर का कहना है कान्हा गोशाला के गोवंशोें के लिए भी सरकार को बजट आवंटित करना चाहिए।
जिले में है 55 गोशाला
जिले में 55 गोशालाएं हैं। इनमें दो सौ गोवंश की क्षमता वाली दो बड़ी गोशाला है। बाकी 53 छोटी गोशालाएं हैं। इन गोशालाओं को 6146 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 1600 गोवंशों को और संरक्षित किया जाना है।
कैटल कैचिंग दस्ता ने चलाया अभियान
नगर पालिका परिषद के कैटल कैचिंग दस्ता ने आवारा गोवंश पकड़ों अभियान चलाया है। शहर के विभिन्न स्थानों में सड़क पर धूम रहे गोवंशों को पकड़ कर कर्मचारियों ने कान्हा गोशाला पहुंचाया। आवारा गोवंशों को पकड़ने का काम जारी रहेगा।
- विनय कुमार मणि तिवारी, ईओ नगर पालिका इटावा।