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धर्म आधारित राजनीति बंद हो

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इटावा। अमर उजाला का सत्ता का संग्राम चुनावी रथ युवाओं का मन टटोलने उनके बीच पहुंचा। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर कृषि एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में कई ट्रेडों में तकनीकी शिक्षा हासिल करने आए कई जिलों के युवाओं ने प्रदेश के राजनीतिक हालात और वर्तमान सरकार के बारे में बेबाकी से अपनी राय रखी।
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युवाओं ने रोजगार के कम होते अवसरों पर जहां चिंता व्यक्त की वहीं धर्म और जाति के राजनीति में घालमेल को अनुचित बताया। प्रदेश सरकार की कार्यशैैली ओर कृषि कानूनों की वापसी को लेकर सभी ने अलग-अलग राय दी।
किसी ने कृषि कानूनों की वापसी को अनुचित तो किसी ने उचित बताया। हालांकि, प्रदेश में अपराधों पर अंकुश को लेकर ज्यादातर युवा प्रदेश सरकार के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। युवाओं ने महंगाई को भी मुद्दा नहीं माना।
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इस मुद्दे को कोरोना महामारी में निशुल्क टीकाकरण से जोड़कर देखने की बात कही। बीएससी कर रहे मुकीम ने कहा कि शिक्षा में नकल को समाप्त करने जैसे कुुछ काम सरकार ने अच्छे किए हैैं, परंतु भाजपा में वोटों के लिए धर्म की राजनीति को वे नापसंद करते हैं।
जाति और धर्म की राजनीति नहीं होनी चाहिए। बीएससी के छात्र जितेंद्र सरकार के कामकाज से नाखुश दिखे। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के साथ किए वादे पूरे नहीं किए।
हर्ष पांडेय ने सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि योगी सरकार में गुंडागर्दी खत्म हुई है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। अयोध्या का विकास अब देखने लायक है। सरकार अच्छा काम कर रही है।
अभिषेक ने कहा कि सरकार ने नकल विहीन परीक्षाएं करवाकर अच्छा काम किया है। प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। नकल से पास होने वाले छात्र अक्सर प्रतिभाओं के रास्ते की रुकावट बन रहे थे।
आदित्य ने कहा कि वे आर्मी में जाकर देेश की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते, परंतु सबको एक साथ जुड़कर देश हित में काम करना चाहिए।
विपिन कश्यप ने कहा कि सरकार ने गांवों में विकास कार्य किया है। सरकार तो अच्छा काम कर रही है, परंतु सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता माहौल खराब करते हैं। विशाल ने कहा कि सरकार ने आवारा पशुओं की रोकथाम को लेकर सही तरीके से काम नहीं किया।
कृषि कानूनों की वापसी पर भी युवाओं की राय अलग अलग रही। कुछ छात्रों ने बताया कि कृषि कानून छोटे किसानों के लिए बहुत उपयोगी थी, परंतु कुछ विपक्षी दलों के इशारे पर आंदोलन चलाया गया। चुनावों को देखते हुए सरकार को दबाव में कानून वापस लेने पड़े।
कुछ छात्रों ने इस कानून को वापस लेने को सही कदम बताया। छात्रों ने कहा कि बेसिक शिक्षा में सुधार के लिए दिल्ली का माडल लागू किया जाना चाहिए। बेसिक शिक्षा को अंग्रेजी माध्यम से लागू किया जाए, क्योंकि गरीब किसान का बेटा जब हिंदी माध्यम से प्राइमरी, जूनियर और माध्यमिक परीक्षा पास करके तकनीकी या मेडिकल शिक्षा हासिल करना चाहता है तो वहां अंग्रेजी माध्यम चलता है।
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ऐसे में बड़ी विसंगति हो जाती है। किसान का बेटा पीछे रह जाता है।
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