इटावा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करने और जनजाति समाज के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा को जयंती पर याद किया।
सेवन हिल्स विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विभाग सह प्रमुख डॉ. पद्मा त्रिपाठी ने बिरसा मुंडा के स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका के बारे में बताया। कहा कि मुंडा जनजाति में फैली कुरीतियों को भी दूर करने अपनी संस्कृति व परंपराओं को सहेजने में निभाई भूमिका के कारण ही मुंडा समाज उनको भगवान मानता है।
प्रधानाचार्य सौरभ दुबे ने भावी पीढ़ी को बिरसा मुंडा सहित सभी शहीदों की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी को सदैव याद रखने को कहा। नगर संगठन मंत्री सागर पाठक ने उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।
नगर अध्यक्ष डॉ. सुनील सेंगर ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस घोषित करना दूरगामी परिणाम लाएगा। कहा कि केंद्र सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए अभिनंदन।
जिला सहसंयोजक अभिषेक राठौर ने कहा कि अपनी संस्कृति, प्रकृति, जंगल, जमीन और परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध अतुलनीय वीर गाथाएं जनजाति क्षेत्र में भरी पड़ी हैं। अब समय आ गया है, उन सबको देश के सामने लाया जाए।
इस मौके पर नेत्रहीन बच्चों व गणेश शंकर छात्रावास में रह रहे असम के छात्रों के बीच फलों और पुस्तकों का वितरण किया।
कार्यक्रम में जिला आंदोलन प्रमुख आयुष नगर संगठन मंत्री सागर, पवन दुबे, भरत तोमर, उज्ज्वल द्विवेदी, पवन श्रीवास्तव, राहुल गौतम मौजूद रहे। जिला संयोजक अजय राजपूत ने आभार जताया।
प्राणों की आहुति देेने वाले जननायक थे मुंडा
इटावा। आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रृंखला में बसरेहर के उच्च प्राथमिक विद्यालय चकवा खुर्द में आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती मनाई गई।
शिक्षकों और छात्रों ने मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए स्टेट रिसोर्स पर्सन राम जनम सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जननायक थे।
काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी।