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जिले में दिखने लगा कोयला संकट का असर

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गंगनपुर स्थित बिजली ट्रांसमिशन।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। विद्युत संयंत्रों में कोयले का संकट स्थानीय स्तर पर भी नजर आने लगा है। उत्पादन कम होने से बिजली कटौती शुरू हो गई है। जिला मुख्यालय पर 24, तहसील व कस्बों में 21:30 व गांव में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति देने के निर्देश हैं, लेकिन कई दिनों से कोयले की कमी के कारण विद्युत संयंत्रों पर बिजली का उत्पादन पूरी क्षमता के साथ नहीं हो पा रहा है। इससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। शहर में भले ही अभी हालात काबू में हैं, लेकिन कस्बों में कटौती जमकर हो रही है।
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आठ अक्तूबर को कस्बों में 21:30 घंटे के स्थान पर 16:45 घंटे ही आठ अक्तूबर को बिजली की आपूर्ति दी गई। वहीं तहसील में 21:30 के स्थान पर 17:30 घंटे आपूर्ति दी गई। जबकि ग्रामीण कृषि वाले फीडरों पर आठ अक्तूबर को 18 घंटे के स्थान पर 14:25 घंटे की आपूर्ति दी गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के अन्य फीडरों पर 18 के सापेक्ष 12:20 घंटे ही आपूर्ति दी गई। नौ व दस अक्तूबर को आपूर्ति में सुधार हुआ है, लेकिन कोयले की कमी से संकट बना हुआ है।
घंटों की जा रही कटौती से परेशान हैं लोग
मिरहची/राजा कारामपुर/सकीट। कस्बा मिरहची में विद्युत कटौती के चलते लोगों में रोष पनप रहा है। मायाप्रकाश चौहान, बृजेश कुमार साहू, राजपाल सिंह चौहान, जेपी कश्यप, मुकेश साहू, पंकज यादव आदि का कहना है कि दिन में दो से तीन घंटे कटौती होती है। जबकि रात में 11 से 12 बजे के बाद आपूर्ति मिलती है और तड़के 3 बजे कटौती कर दी जाती है।
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सकीट में भीषण गर्मी में बिजली की आंख मिचौली से लोग त्रस्त हैं। लोगों के मुताबिक क्षेत्र में करीब छह से आठ घंटे की अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। कस्बा राजा का रामपुर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था भी चरमराई हुई है। लगातार तीन से चार घंटे की कटौती की जा रही है। राकेश सिंह, आविद खां, देशराज, कृपाल, रजनेश, हरीसिंह, राजीव, श्रीकृष्ण, महेश आदि का कहना है कि बुधवार को तीन, बृहस्पतिवार तथा शुक्रवार को चार-चार घंटे बिजली गुल रही।
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