एटा। क्षेत्र में भूजल खारा है। इसकी बड़ी वजह यहां संचालित होने वाले शोरा (पोटेशियम नाइट्रेट) कारखाने हैं। साथ ही जलेसर टीटीजेड में भी आता है। इस क्षेत्र में शासन ने इन कारखानों के संचालन पर रोक के आदेश दिए थे। इसके बावजूद रोक नहीं लग सकी। यहां तैयार शोरा, सल्फर कई प्रदेशों तक भेजा जाता है और इसका प्रयोग विस्फोटक बनाने में भी होता है। गुजरात में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद जलेसर भी जांच के घेरे में आ गया। यहां से सामग्री इस फैक्टरी में भेजी गई थी।
करीब ढाई दशक पहले शासन के आदेश पर इन शोरा कारखानों पर प्रतिबंधित लगाया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर की ढिलाई के कारण यह रोक कारगर नहीं हो सकी। आगरा रोड, फिरोजाबाद रोड, इसौली रोड, समसपुर रोड, दरगाह रोड, सिकंदराराऊ रोड, हाथरस रोड, सादाबाद रोड, सासनी रोड आदि जगहों पर शोरा कारखाने आज भी संचालित हैं। तमाम कारखानों में रासायनिक प्रक्रिया से शोरा बनाने का काम किया जा रहा है।
इसके लिए लकड़ी-भूसा जलाया जाता है। जबकि टीटीजेड क्षेत्र में इस तरह का वायु प्रदूषण दंडनीय है। करीब दो साल पहले तहसील प्रशासन ने इन कारखानों को नोटिस देकर कार्रवाई की थी। बाद में फिर ये संचालित हो गए।
कस्बे में ही संचालित दो शोरा कारखानों से गुजरात के डीसा में चल रही एक अवैध पटाखा फैक्टरी को शोरा आदि भेजा गया था। इस सिलसिले में गुजरात पुलिस मंगलवार को जलेसर आई थी और पड़ताल करने के बाद कारखाना मालिकों के बयान दर्ज कर ले गई। पुलिस जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने पर कार्रवाई भी हो सकती है।
वर्जन
संयुक्त टीम के माध्यम से कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए उपायुक्त उद्योग को पत्र जारी किया है। जल्द ही टीम के माध्यम से अवैध चल रहे कारखानों को बंद कराया जाएगा। -भावना विमल, एसडीएम जलेसर