जलेसर (एटा)। बोगस फर्मों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में करीब पांच से छह करोड़ रुपये हड़पे जाने का अनुमान है। दो दिन पहले सेंट्रल जीएसटी की छापेमारी के बाद अब राज्यकर विभाग की ओर से पांच फर्म मालिकों पर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
27 अगस्त को सेंट्रल जीएसटी की टीम ने जलेसर में 5 बोगस फर्मों पर एक साथ छापेमारी कर फर्जी आईटीसी रिफंड का खुलासा किया था। इसी महीने की शुरूआत में राज्य कर विभाग ने भी इन फर्मों की जांच की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने छापे मारे तो इन फर्मों की पोल खुल गई। इन फर्माें के माध्यम से गिलट के आभूषणों के निर्माण का कारोबार दिखाया जाता था। सरकार इस पर 15 प्रतिशत जीएसटी की छूट देती है। ये फर्में फर्जी बिलों के जरिये इस 15 प्रतिशत आईटीसी रिफंड के रूप में रुपया निकालती रहीं। अनुमान लगाया जा रहा है कि ये धनराशि पांच से छह करोड़ रुपये तक हो सकती है।
सीजीएसटी के दखल के बाद अब राज्य कर विभाग के उपायुक्त राकेश प्रताप राव ने तहरीर देकर पांच अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं। इनमें निधि एंटरप्राइजेज के मालिक सरायखानम निवासी विकास बघेल पर अपनी फर्म के जरिये बोगस आईटीसी रिफंड लेकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। मंडी जवाहरगंज निवासी अनुज वार्ष्णेय प्रो. सृष्टि एंटरप्राइजेज, अकबरपुर हवेली निवासी दीपांकर भारती प्रो. ओम आर्टिफिशियल, सुमित कुमार निवासी जलेसर देहात प्रो. श्री श्याम एंटरप्राइजेज, गली बोहरान निवासी गोलू जैन प्रो. जैन एंटरप्राइजेज पर फर्जी आईटीसी का रिफंड प्राप्त कर राज्यकर विभाग के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है।
मास्टर माइंड की तलाश
यह भी माना जा रहा है कि इन बोगस फर्मों के संचालक मोहरे मात्र हैं। इनके पीछे मास्टरमाइंड और ही हैं जो रिफंड की मोटी रकम खुद हड़पते थे और इन फर्म मालिकों को उनके खातों का इस्तेमाल करने के लिए कुछ पैसा दे दिया जाता था। दो मामलों में फर्म के अकाउंटेंट के रूप में सोनू कुशवाह का नाम सामने आया है।
वर्जन
सीजीएसटी और राज्य कर की अलग-अलग जांचें चल रहीं हैं। इसके अलावा रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस भी अपने स्तर से जांच करेगी। - राकेश कुमार राव, उपायुक्त जीएसटी