एटा। सुई-धागे के हुनर ने जिले की महिलाओं के जीवन में नया उजाला भर दिया है। अलीगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत राया के सिद्धार्थ राव महिला स्वयं सहायता समूह ने अपने श्रम और संकल्प से आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक मिसाल कायम की है।
समूह की अध्यक्ष नीलम ने न सिर्फ स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि दस अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उनके जीवन में बदलाव ला दिया है। ये महिलाएं अब जैकेट सिलकर अपने परिवार के लिए सुनहरे भविष्य का रास्ता बुन रही हैं। नीलम के अनुसार, उनका सपना घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार देना था। इसी सोच ने उन्हें जैकेट बनाने का काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। एक प्रशिक्षण केंद्र से हुनर सीखकर उन्होंने गांव में ही एक छोटा कारखाना शुरू किया। आज उनके समूह द्वारा बनाई गई जैकेटों की मांग न केवल एटा, बल्कि आसपास के जिलों में भी है।
एक दिन में तैयार हो जाती हैं 20 जैकेट
व्यवसाय का तरीका स्पष्ट है। दिल्ली जैसे महानगरों से कच्चा माल मंगाया जाता है। गांव में महिलाएं मिलकर जैकेट तैयार करती हैं और फिनिशिंग के बाद उन्हें विभिन्न बाजारों में भेज दिया जाता है। पिछले सर्दी के मौसम में समूह ने लगभग 3 लाख रुपये की आय अर्जित की थी। इस साल भी ठंड की शुरुआत के साथ ही अच्छे ऑर्डर मिलने लगे हैं। प्रत्येक जैकेट (700 से 1100 रुपये मूल्य) से उन्हें 150 से 200 रुपये तक का लाभ मिलता है। समूह प्रतिदिन 20 से अधिक जैकेट तैयार कर लेता है।
इटावा, फर्रुखाबाद में अच्छी खासी डिमांड
इन जैकेटों की खासियत है इनमें जड़ा भारी और गर्म फर, जो इन्हें बाजार के अन्य जैकेटों की तुलना में अधिक गर्म और टिकाऊ बनाता है। यही कारण है कि कासगंज, मैनपुरी, इटावा, फर्रुखाबाद के साथ-साथ जिले के धुमरी, जलेसर, अलीगंज जैसे कस्बों में इनकी अच्छी खासी मांग है।
महिलाएं बन रहीं सशक्त और आत्मनिर्भर
एनआरएलएम की जिला समन्वयक प्रतिमा निमेश ने बताया कि नीलम और उनका समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। विभाग ऐसे समूहों की मदद कर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रहा है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण का एक सफल उदाहरण है।