जैथरा/एटा। गांव नगला धीरज में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एड्स पीड़ित दंपती की मौत के बाद उनके दो बच्चे असहाय हो गए हैं। इनका इलाज जिले से लेकर फर्रुखाबाद और दिल्ली तक चला अब प्रशासन क साथ ही समाजसेवी भी मदद को आगे आ रहे हैं।
गांव नगला धीरज निवासी बालक ने बताया कि ताऊ ने वृंदावन और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में करीब दो वर्ष तक इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर लगभग एक वर्ष पूर्व उनकी मौत हो गई। इस दौरान ताई भी उसी बीमारी से ग्रसित हो गईं। उनका भी दिल्ली, फर्रुखाबाद और एटा के सरकारी अस्पताल में इलाज कराया गया। एक सप्ताह पहले वह एटा के सरकारी अस्पताल में दवा लेने गई थीं। इसके बाद उनकी भी मौत हो गई। बताया कि मृतक 3 भाई थे। माता-पिता की गरीबी और लंबी बीमारी के कारण इनके बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई। मृतका का मायका अलीगंज क्षेत्र में था, वह लोग अब फर्रुखाबाद में रह रह रहे हैं। मायके और ससुराल दोनों ही पक्ष की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है।
प्रशासन व समाज सेवियों ने बढ़ाया मदद को हाथ
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। विभिन्न सरकारी विभागों ने बच्चों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए। कहा कि सरकारी योजनाओं के अनुसार जो भी मदद होगी, की जाएगी। इसके साथ ही जिले के कई समाजसेवी भी मौके पर पहुंचे और बच्चों को कंबल, कपड़े व खाद्य सामग्री प्रदान की।
नहीं थम रहे बालक के आंसू
बीमारी के चलते माता-पिता को खो चुके बालक के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। माता-पिता की याद कर बालक बार-बार दहाड़ें मारकर रोने लगता है। चुप कराने के बाद भी उसकी सिसकियां नहीं रुकतीं।
आधार के लिए हुआ नामांकन
आधार कार्ड न होने की वजह से बालक न तो विद्यालय जा पा रहा था और न ही उसे किसी सरकारी योजना का लाभ मिल पा रहा था। इस हादसे के बाद आधार के लिए शनिवार को उसका नामांकन कराया गया है। आधार बनने के बाद सभी सरकारी योजनाओं को उसे लाभ मिल सकेगा।
वर्जन
बेटी का प्रवेश कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कराने की बात हो गई है। राशन कार्ड में दो यूनिट हैं। इसके अलावा उनके लिए राशन का भंडारण करा दिया गया है। उनकी जमीन के लिए तहसीलदार को संरक्षक बनाया जा रहा है। स्पॉन्सरशिप योजना से चार-चार हजार रुपये महीने की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। - जगमोहन गुप्ता, एसडीएम अलीगंज