कांग्रेस में दूसरे पायदान का ओहदा रख्ाने वाले राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश की कुछ रैलियों में जुटी कम भीड़ ने प्रदेश्ा कांग्रेस को सकते में ला दिया है।
कांग्रेस ने इसे देखकर 'पैनिक बटन' दबा दिया है। राज्य में कांग्रेस के प्रभारी मधूसूदन मिस्त्री को पार्टी ने कहा कि अमेठी में होने वाली रैलियों में भीड़ जरूर आनी चाहिए।
मिस्त्री ने 9 नवंबर को सभी जोनल इंचार्ज के साथ, संयोजकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है, जिसमें अगली रैलियों की रणनीति बनाई जाएगी।
राहुल नवंबर में चार और रैलियों को संबोधित करेंगे। इसके बावजूद कांग्रेस ने कोई अंतिम प्लान नहीं बनाया है।
अब तक अलीगढ़, रामपुर, हमीरपुर और सलीमपुर में हुईं चार रैलियों में पार्टी के अनुसार भीड़ कम थी। अलीगढ़ और हमीरपुर में भीड़, 'संतोष से भी कम' थी। वहां लगभग 20 हजार या उससे भी कम लोग पहुंचे थे। इसके उलट रामपुर और सलीमपुर में 50 हजार की भीड़ मौजूद थी।
हमीरपुर में आई कम भीड़ को राहुल ने भी नोटिस किया था। पार्टी ने इसकी जिम्मेदारी झांसी सांसद और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री प्रदीप जैन के साथ कांग्रेस विधायक ज्ञादीन, विवेक कुमार सिंह और दलजीत सिंह को सौंपा था, लेकिन वह रैली ग्राउंड को भर नहीं पाए।
इसका बचाव करते हुए एक नेता ने कहा कि हमीरपुर में भीड़ जुटाने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन फसलों की कटाई के बाद के काम में लगने के कारण वे रैली में नहीं आ पाए।
अब तक हुई राहुल की चारों रैलियां कांग्रेस की रणनीति के हिसाब से बेहद खास थी क्योंकि 2009 के चुनावों में इन चारों जगहों में से तीन में कांग्रेस दूसरे और एक में तीसरे स्थान पर थी।
हमीरपुर, सलीमपुर और रामपुर में कांग्रेस दूसरे स्थान पर थी जबकि अलीगढ़ में चौधरी बृजेंद्र सिंह 23.95 प्रतिशत वोट लाकर भी हार गए थे।
रामपुर में कांग्रेस की बेगम नूर बानो समाजवादी पार्टी की जयाप्रदा से हार गई थी, वहीं हमीरपुर में सिद्ध गोपाल साहू को बीएसपी के विजय बहादुर सिंह ने हरा दिया था और सलीमपुर में भोला पांडे को बीएसपी के ही रामशंकर राजभर ने परास्त किया था।