वायरल फीवर की चपेट में बच्चे, पीआईसीयू वार्ड फुल
देवरिया। जनपद में वायरल फीवर का प्रकोप थम नहीं रहा है। इसकी चपेट में सबसे अधिक बच्चे आ रहे हैं। सामान्य दिनों की अपेक्षा अस्पताल में भीड़ बढ़ गई है। पीआईसीयू वार्ड के बेड भर गए हैं। एक बेड पर दो मासूमों का इलाज चल रहा है। बेड खाली होते ही भर जा रहा है। निजी अस्पतालों में भी भीड़ है। अस्पताल में संसाधन भी कम पड़ रहे हैं। इंजेक्शन व कुछ दवाएं कम पड़ जा रही हैं।
मौसम बदलने से वायरस पांव पसार रहा है। लिहाजा संक्रमण फैल रहा है। इससे सर्वाधिक बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। तकरीबन हर घर में लोग बीमार हो रहे हैं। वायरल फीवर के मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के बुखार के तकरीबन सौ मरीज इलाज कराने आए। इसमें बच्चों की अधिक संख्या रही। बाल रोग विभाग के ओपीडी में बुखार, सर्दी, खांसी, सांस, उल्टी-दस्त, निमोनिया, झटका के करीब अस्सी मरीज इलाज कराने आए। इनमें कुछ की हालत गंभीर देख भर्ती किया गया।
आलम यह रहा कि पंद्रह बेड के पीआईसीयू में लगभग 27 बच्चे थे। अधिकांश बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा था। इसके बगल में बने वार्ड तथा चिल्ड्रेन वार्ड में भी सभी बेड भरे थे। अस्पताल में भीड़ के कारण लोग निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। वहां भी भीड़ है। जिला अस्पताल में भीड़ के आगे सुविधा कम पड़ रही है।
पहली जनवरी से अब तक एईएस के 63 मरीज आए। इसमें तीन भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। वहीं, अभी तक गंभीर 21 मरीजों को रेफर किया गया है। डेंगू व जेई के तीन-तीन तथा स्क्रब टाइफस के 26 मरीज अब तक आए हैं।
आइसक्रीम, शीतल पेय पदार्थ, फ्रीज का ठंडा पानी, खुले में बिकने वाले सामान का सेवन न करें- पूरी बांह का कपड़ा पहनाएं और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
ये बरतें सावधानी-
- स्कूल में बच्चे मास्क लगाए रखें। समय-समय पर हाथ की सफाई व सैनिटाइज करते रहें
- भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर बच्चों को न जाने दें
- बच्चों को बारिश में भींगने तथा धूप में निकलने न दें
- सर्दी, जुकाम व खांसी से पीड़ित व्यक्ति के पास बच्चों को न जाने दें, उनसे दूरी बनाकर रखें
चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने कहा कि मौसम बदलने से वायरस का प्रकोप बढ़ जाता है। कम इम्युनिटी के कारण बच्चे वायरल फीवर की चपेट में आ जाते हैं। इस समय अस्पताल में बच्चे अधिक आ रहे हैं। कहा कि बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर लापरवाही न करें। चिकित्सक को दिखाएं और दवा दें। अस्पताल में संसाधन और दवा की कमी नहीं है।