स्वास्थ्य कर्मियों को दी कालाजार और कुष्ठ रोग के लक्षण व बचाव की जानकारी
देवरिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से कुष्ठ और कालाजार बीमारियों से संबंधित कार्यशाला का आयोजन बुधवार को स्टेशन रोड स्थित एक कांफ्रेंस हाल में एसीएमओ डॉ. संजय चंद की अध्यक्षता में किया गया। इसमें कालाजार और कुष्ठ रोग के इलाज में लगे स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के लक्षणों और बचाव के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही एक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। इस दौरान फोकस कालाजार, ट्रीट कालाजार और बीट कालाजार का नारा दिया गया और उस पर अमल का संकल्प लिया गया। एसीएमओ ने कहा दिव्यांग कुष्ठ रोगियों को जीवन भर 2500 रुपये मासिक पेंशन देने के साथ नि:शुल्क इलाज व पुनर्वास की सुविधा है। निजी क्षेत्र में इलाज कराने पर कुष्ठ रोगी को 2500-3000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। इसी तरह कालाजार के मरीज निजी क्षेत्र में इलाज करवाने के लिए डेढ़ से दो लाख तक खर्च करते हैं, जबकि जिला अस्पताल में इसका नि:शुल्क इलाज किया जाता है। सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने पर कालाजार के सामान्य मरीज को पांच सौ रुपये और चमड़ी वाले कालाजार (पीकेडीएल) मरीज को 4000 रुपये उसके खाते में दिए जाते हैं।
डब्ल्यूएचओ के नेगलेक्टेड डिजीज प्रोग्राम (एनटीडी) के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ. सागर घोड़ेकर ने बीमारी के सभी तकनीकी पक्षों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि कालाजार रोग बालू मक्खी के काटने से होता है। बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने के लिए दवा का छिड़काव जरूरी है।
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता डॉ. इरशाद आलम खान ने कहा कि कुष्ठ रोग के संपूर्ण उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग सजग है। विभाग की ओर से कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के संकल्प के तहत अब कुष्ठ मरीजों की पहचान की जा रही है। इस दौरान डीएमओ आरएस यादव, डॉ. फातिमा. डॉ. तैयब अली, डॉ. राजबहादुर, डॉ. प्रभात जैन, डॉ. सपना सिंह, डॉ. अनुपम कुमार दूबे आदि मौजूद रहे।