दिवाली मेले में गधामेला के लिए खच्चर लेकर भी कई जिलों से लोग पहुंचे। संवाद
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चित्रकूट। धर्मनगरी मेें पांच दिवसीय मेला कई तरह के अजूबे देखने को मिलते है। इस मेला को अनोखा मेला भी कहा जाता है। जहां गधों का बाजार लगने के साथ ही कई प्रांतों के रहने वाले सपेरा भी डेरा डाल देते है। इसके अलावा जादू टोना वाले अघोरी भी अपनी अलख यहां पर जगाते है। जो इस बार भी डेरा डाल दिया है। जिनमें खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मेले में प्रतापगढ़ के व्यापारी राजनारायण, कौशांबी जिले के व्यापारी अनोखे लाल ने बताया कि दो साल कोरोना के कारण व्यापार उनका चौपट हो गया था। इस बार दिवाली मेला में चित्रकूट में गधे बेचने का व्यापार होगा। बताया कि परीवा के दिन गधों का बाजार लगेगा। जिससे उन्हें भारी उत्साह है। सपेरे भी कई प्रदेशों से आये है। जो परिवार सहित एक स्थान पर डेरा डाले हुए है। इसके साथ ही सर्प भी दिखाकर धन कमा रहे है। मप्र के रीवा जिले के सपेरा सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पुरखे भी दिवाली मेला में आते थे। जिससे वह हर साल आते है। यहां सपेरों की पंचायतें भी लगती है। लड़के लड़कियों के रिश्ते भी तय किये जाते हैं। अघोरी भी डेरा डाल दिया है। कामदगिरी पहाड़ के नीचे बैठकर अलख जगा रहे हैं।