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प्राकृतिक खेती के तौर तरीके देखे

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चित्रकूट। भारतीय परंपरागत तरीके से की जा रही खेती की जानकारी लेने के लिए मानिकपुर क्षेत्र के टिकरिया गांव के आसपास का कमासिन ब्लाक के पन्नाह गांव की जलागम विकास समिति के 20 महिला एवं पुरुष प्रगतिशील किसानों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान 2 वर्षों से प्राकृतिक कृषि पर कार्य कर रही है। संस्थान के प्राकृतिक कृषि व जलागम के प्रयासों को जानने, समझने व देखने के लिए किसानों ने खेतों में जाकर अध्ययन किया।
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टिकरिया में मियावाकी पद्धति से तैयार तपोवन में किसान दल ने अध्ययन किया। मियावाकी पद्धति के बारे में संस्थान के विजय सिंह ने बताया कि एक बीघा में 2940 छोटे बड़े पौधे लगाए गए। इस पद्धति की विशेषता यह है कि कोई भी पेड़ पौधे एक दूसरे के विकास को बाधित नहीं करते हैं। उन्होंने आगे टिकरिया उद्यान का भी अवलोकन कराया तथा बताया कि उद्यान संस्थान के सहयोग से यहां के किसानों की समितियों के द्वारा तैयार कराया गया है। इसका उद्देश्य यह था कि इस पर होने वाले फलों से उनकी आजीविका का कार्य होता रहे। इस उद्यान में आंवला, अमरूद, बेल आदि पौधे तैयार कराए गए हैं जो आज फल दे रहे हैं और यहां उनकी आजीविका का कार्य कर रहे हैं।
संस्थान द्वारा नाबार्ड के सहयोग से ग्राम पाटिन में कराए गए जलागम कार्यों का अवलोकन भी कराया गया तथा वहां की जलागम विकास समिति के सदस्यों से भी मिलवाया गया। समिति के अध्यक्ष हीरामणि द्विवेदी ने बताया कि संस्थान ने यहां मेड़बंदी, चेकडैम व पौधरोपण का कार्य किया है। इस समय संस्थान के सहयोग से हम सब प्राकृतिक खेती का कार्य कर रहे हैं। देसी बीज भी संस्थान उपलब्ध करा रही है। बुधराज, रामानुज रामकुमार, सत्यप्रकाश, मनोरमा, राजाबुआ उपाध्याय, विश्वदीप, शुभम, शिवबरदानी आदि मौजूद रहे।
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