चित्रकूट। नगर पालिका के कई अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा लाखों रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी करने और गुणवत्तापूर्ण काम न करने की शिकायत की जांच रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें जांच कमेटी के अधिकारियों ने नगर पालिका अध्यक्ष को क्लीन चिट मिली लेकिन बांदा की एक विद्युत सामग्री आपूर्ति करने वाली एजेंसी के लाखों के भुगतान को कटघरे में खड़ा किया गया है। विद्युत पोल मानक से कम वजन व कम स्थानों पर लगे मिले। पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई है।
नगर पालिका के सभासद सुशील श्रीवास्तव व उसके कुछ सहयोगियों ने पालिका अध्यक्ष समेत विभागीय अधिकारियों पर 20 सितंबर 2019 में कई गंभीर आरोप लगाकर जांच की मांग की गई थी। इसके लिए अनशन भी किया गया। जिस पर तत्कालीन डीएम के निर्देश पर 17 अक्तूबर 2019 को तीन सदस्यीय अधिकारियों (पदेन सदर एसडीएम, पीडब्ल्यूडी एक्सिएन व आरईएस विभाग के एई) के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई थी। अब यह जांच रिपोर्ट पूरी होने पर सदर एसडीएम पूजा यादव ने डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल को भेजी है। जांच में यह सब नियमानुसार कार्य मिला है।
इसके अलावा पालिका के लकड़ी खरीद टेंडर में गड़बड़ी मानी है और संबंधित ठेकेदार व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। कुछ ठेकेदारों के दो साल से काम पूरे होने के बाद भी भुगतान न किये जाने के आरोप सही पाये गए। आउटसोर्सिंग के नाम पर गड़बड़ी की शिकायत के कई बिंदु सही पाये जाने पर जांच टीम ने संबंधित अधिकारी, कर्मचारी व ठेकेदार पर कार्रवाई करने को कहा है।
इसी प्रकार जांच टीम ने माना है कि बांदा की मां काली इलेक्ट्रिकल अलीगंज को कई भुगतान एमबी तैयार होने के पूर्व किया गया है। 164 किलो मानक के अनुरूप बिजली के खंभों में 124.800 ग्राम के पोल लगाये गए। 36 स्टेराड की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। दो पोल लगे ही नहीं मिले। ऐसे में संबंधित अधिकारी व कर्मचारी द्वारा जानबूझकर व्यक्तिगत लाभ की मंशा से वित्तीय अनियमितता की गई है। जांच टीम ने दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की है। अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट डीएम के पास पहुंचने के बाद अग्रिम कार्रवाई क्या होती है।