चित्रकूट। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि किसान पराली किसी भी दशा में न जलाएं। इसको एक स्थान पर एकत्र कर खाद के रूप में तैयार करें। पराली व कटी फसल के बाद बची खेतों की सामग्री को बर्मी गड्ढे में एकत्र कर बेस्ट डिकम्पोजर के सहयोग से कंपोस्ट खाद बनाए या खेत में ही फसल अवशेष को सड़ा कर नवीन यंत्रों के माध्यम से जुताई करते हुए बुवाई का कार्य करें। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से तरह-तरह के नुकसान होते हैं। मिट्टी के लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। मृदा ताप में वृद्धि होती है। इसकी वजह से मृदा के भौतिक रासायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से अनेक गंभीर बीमारियां, धुंध से दुर्घटनाएं हो सकती हैं। पशुओं के चारे की व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से कहा है कि पराली किसी भी दशा में न जलाएं।