चित्रकूट। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में कार्यरत जिले के 15 ब्लाक मिशन प्रबंधकों ने सामूहिक इस्तीफा मुख्यमंत्री समेत विभागीय मंत्री व अधिकारियों को भेजा है। जिसमें जिले के विभागीय अधिकारियों पर मानसिक व आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया है। तीन माह का मानदेय न देने और अधिकारियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है।
जिले के पंाच ब्लाक में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए कई कार्य हो रहे हैं। इसके लिये हर ब्लाक में ब्लाक मिशन प्रबंधक कार्यरत हैं। कुल 23 ऐसे कर्मचारियों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि पहले इस योजना में चित्रकूट जिले में कई अच्छे काम हुए जिससे इसका स्थान प्रदेश के टॉप फाइव में शामिल रहा लेकिन अब विभागीय अधिकारियों की मनमानी व गलत नीतियों के कारण गड़बड़ी हो रही है। तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। मांगने पर अधिकारी अभद्रभाषा का प्रयोग कर भगाते हैं। हर बार नौकरी से निकालने की धमकी देकर मनमानी करते हैं। आरोप लगाया कि कई जिम्मेदार अधिकारी अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं करते और दोष ब्लाक मिशन प्रबंधकों को दिया जाता है। ऐसे में कई बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिससे क्षुब्ध होकर सभी ने मुख्यमंत्री, ग्राम्य विकास मंत्री, मुख्य सचिव व मिशन निदेशक को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफा भेजा है। इस संबंध में डीसी एनआरएलएम सुदामा प्रसाद ने बताया कि इसकी मौखिक जानकारी मिली है लेकिन कोई पत्र उन्हें नहीं मिला है।