पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति।
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चित्रकूट में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ जंग लड़ने वाली महिला ने जहां ठेकेदारी की, वहीं पति से मनमुटाव होने पर अपने बच्चों की भी हिम्मत के साथ परवरिश की। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला की जीवन गाथा भी किसी फिल्मी कहानी जैसी है।
यह महिला शादी के कुछ दिनों बाद तक गृहणी की तरह ही घर में रहती थी। गृहस्थी चलाने में समस्या आने पर पर कुछ युवकों के साथ साझे मेें खनिज की ठेकेदारी का कार्य शुरू कर दिया। धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तो वह समाजसेवा का भी कार्य करने लगी। धर्मनगरी मेें आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने और ठहरने का इंतजाम करती रही। पति से मनमुटाव हुआ तो भी हिम्मत नहीं हारी। तीन बेटियों और एक बेटे की खुद हिम्मत के साथ परवरिश की।
वह संघर्ष के बल पर ही नगरपालिका की सभासद भी बनी। चेयरमैन बनने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। वर्ष 2012 में सपा की सरकार बनने के बाद तत्कालीन कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति को चित्रकूट जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया। गायत्री की अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राजनीतिक रसूख के कारण महिला की पहली भेंट हुई। लोग बताते हैं कि इसके बाद से महिला का रसूख और संपत्ति बढ़ी, लेकिन किसी को यह आभास नहीं था कि मंत्री और उसके साथियों का ऐसा हश्र होगा।
दुष्कर्म पीड़िता खुद अपने बच्चों के साथ इन दिनों कहीं अज्ञातवास में है। फेसबुक, व्हाट्सएप समेत सोशल मीडिया में खासी व्यस्त रहने वाली महिला ने खुद को समाज से पूरी तरह अलग कर लिया है। इसका सबूत फेसबुक पर उसकी अंतिम पोस्ट 17 जून 2020 खुद बयां कर रही है। हालात से परेशान होने के बाद भी हिम्मत न हारने और संघर्ष जारी रखने वाला पोस्ट ‘मत छेड़ मुझको लड़ना मुश्किल होगा, लिखेंगे ऐसा इतिहास कि पढ़ना मुश्किल होगा। अब इस चर्चित दुष्कर्म मामले का फैसला आने के बाद माना जा रहा है कि उसका अंतिम संदेश बताता है कि वह हौसला छोड़ने वाली महिला नहीं है।
अपनों ने ही दिया धोखा
दुष्कर्म पीड़िता अपनों से ही धोखा खाती रही है। हमीरपुर के जिस युवक पर वह विश्वास करती थी, वही उसको दगा दे गया। आरोप है कि उसकी कई संपत्ति उसने हथिया ली हैं। उसके खिलाफ महिला ने कई बार अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर अपना घर छोड़कर वह कहीं चली गईं।
कई जिलों में रही दखलंदाजी
सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में पूर्व मंत्री के साथ सजा पाने वाले आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी खनिज ठेकेदारों से वसूली करते थे। बुंदेलखंड के जिलों में डेरा डालकर खनिज ठेकेदारों से वसूली की जाती थी। इसके बाद तत्कालीन खनिज मंत्री से मिलकर मनमुताबिक कार्य कराने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता था। ये दोनों जिसको चाहते थे, उसको ही काम आसानी से मिल जाया करता था। जिस किसी ठेकेदार ने इनसे दोस्ती की वह मालामाल हो गया है। सजा पाने वाले अशोक तिवारी के बारे में बताया गया कि वह चित्रकूट भी आया करता था।