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पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का मामला: दुष्कर्म पीड़िता के घर पर चस्पा है नोटिस, वादी महीनों से लापता

Thu, 11 Nov 2021 10:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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कोर्ट में पेश होने जाते मंत्री गायत्री प्रजापति। - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके सहयोगियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला के घर पर दो ताले लटक रहे हैं और घर के गेट पर लखनऊ पुलिस का एक पुराना नोटिस चस्पा है।पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और दो सहयोगियों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में न्यायालय से दोषी ठहराए जाने पर कर्वी निवासी महिला फिर चर्चाओं में आ गई।
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उसके घर पर महीनों से ताला लटका हुआ है और गेट पर लखनऊ पुलिस का एक पुराना नोटिस चस्पा है, जिसमें बयान दर्ज कराने के  लिए दुष्कर्म पीड़िता को हाजिर होने के लिए कहा गया है। पीड़िता काफी अर्से से लापता है। वह किसी अज्ञात स्थान पर रहती है, जिसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि महिला ने 2014 में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके सहयोगियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। साथ ही यह भी कहा था कि उसकी पुत्री के साथ अश्लील हरकत की गई थी। इस पर 2017 में लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। चार साल तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय में आरोप सिद्ध हो गए हैं।
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इस कारण यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दोष सिद्ध होेने और संभावित सजा पर पीड़िता की प्रतिक्रिया जानने के लिए मीडिया के लोग पहुंचे।  पीड़िता का परिवार इस समय कहां है। महिला के घर पर महीनों से ताला लगा होने की बात आसपास रहने वाले लोग बता रहे हैं। बृहस्पतिवार को गली से निकलने वाले उसके मकान में झांककर कानाफूसी भी करते दिखे। पीड़िता के घर पर लखनऊ की पुलिस द्वारा पुराना नोटिस चस्पा किया हुआ है, जिसमें थाने आकर बयान दर्ज कराने को कहा गया है। जिसमेें बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर होेने की अवधि पर काफी अर्से पहले बीत चुकी है।    

फैसले पर टिकी हैं निगाहें
सामूहिक दुष्कर्म में दोषी करार दिए गए पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके दो सहयोगियों को शुक्रवार (आज) को लखनऊ की अदालत सजा सुनाएगी। इसपर यहां के लोगों की भी निगाहें लखनऊ की ओर हैं। कानून के जानकार बताते हैं कि मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ने जिस तरह बीच में अपना बयान बदला था। उसे लेकर भी अदालत की टिप्पणी का इंतजार है। 

अधिवक्ता रूद्र प्रसाद मिश्र मानते हैं कि पहले अदालत में हुए मजिस्ट्रेटी बयान के आधार पर ही अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है। बयान बदलने को लेकर यदि लिखित बयान दाखिल हुआ होगा तो उसको भी अदालत संज्ञान ले कर कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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