चित्रकूट। जिले के बीहड़ क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने डाकू गौरी यादव को मार गिराने के लिए पुलिस की टीमें लगातार कांबिंग करती रहीं। सात माह पूर्व इस गैंग के इनामी भालचंद्र को मार गिराने में भी एसटीएफ के साथ पुलिस टीम का महत्वपूर्ण रोल रहा तो फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस बार अकेले एसटीएफ टीम ने ही पूरा आपरेशन कर डाला।
चर्चा है कि 31 मार्च को इसी बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के माड़ो बांध के पास इसी गैंग के साथी के साथ मुठभेड़ के मामले में मृतक भालचंद्र की पत्नी नथुनिया की याचिका पर अदालत ने तत्कालीन एसपी समेत 17 एसटीएफ व पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश से सबक लिया है। शुक्रवार की देर रात से शनिवार की तड़के तक इसी क्षेत्र में चली पूरी वारदात के बाद जिले एसपी अपरएसी समेत कई थाने की पुलिस टीम पहुंची लेकिन इनका काम सिर्फ डकैत के शव का पंचनामा, पोस्टमार्टम, बरामदगी और लिखापढ़ी तक ही सीमित रहा। ऐसे में कई सवाल उठे।
हृयूमन राइट्स लॉ नेटवर्क के जिला संयोजक रुद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि पिछली मुठभेड़ में एसटीएफ की टीम ने पुलिस टीम के साथ मिलकर अभियान चलाया जिसमें शायद कुछ कमी रहने से अदालत में बार बार हाजिर होना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखकर इस बार एसटीएफ की टीम ने पूरा अभियान खुद अकेले ही करने का फैसला लिया होगा। इसी के चलते एडीजी एसटीएफ को भी यहां आना पड़ा ताकि अभियान में कोई कसर न रह जाए और डकैत बच न सके।
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इस संबंध में पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल ने बताया कि अपराधी को मार गिराने का काम ही मुख्य है। एसटीएफ भी पुलिस का ही अंग है। अभियान में समय व मौका देखकर काम किया जाता है। डकैतों से क्षेत्र मुक्त होने से अब जिले में कानून का राज होगा और बेहतर व्यवस्था रहेगी।