वर्ष 2020 स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर आया। कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए जान हथेली पर रखकर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ विभागीय अफसरों ने सेवा की एक नई मिसाल कायम की। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से लोग जब घरों में दुबके थे तब कोरोना योद्धा के रूप में परिवार छोड़कर लोगों की जान बचाने में जुट गए थे।
चुनौतियों के बीच एक-एक कर अफसर कोरोना संक्रमित होते चले गए, और एक कर्मी की जान भी चली गई। इसके बावजूद स्वास्थ्य अफसर और कर्मी सेवा से पीछे नहीं हटे।
लोगों के बीच जाकर संक्रमण से लड़ने की दी हिम्मत
डॉ. भवतोष शंखधर स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुरादाबाद से उनका स्थानांतरण बुलंदशहर किया गया। बताया कि जिले में कार्यभार संभालने के बाद सर्वप्रथम कोरोना योद्धा के रुप में खड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों को हिम्मत बढ़ाने का कार्य किया।
जिससे आपात स्थिति में कोई डगमगा न सके। इसी बीच स्वास्थ्य अफसरों के कोरोना पॉजिटिव आने पर सभी साथियों का हौसला बनाए रखा और कार्य में कोई ढील नहीं छोड़ी। बाद में स्वयं संक्रमित मिलने पर भी काम जारी रखा।
संक्रमण के फैलाव को रोकना थी चुनौती
डॉ. रोहताश यादव स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के दौरान विभाग द्वारा सर्विलांस की जिम्मेदारी दी गई। जिसे निभाने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से कैसे लोगों को बचाया जाए।
कहां किस टीम को क्या करना है और कैसे संक्रमित लोगों की पहचान करनी है। इस कार्य के साथ-साथ विभाग की वीसी में शासन को हर तैयारी की पल-पल की खबर दी गई। साथियों से नजदीकि बनाए रखी और लोगों के बीच जाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का मंत्र दिया।
जिम्मेदारी के साथ-साथ कोरोना से किया बचाव डॉ. सुष्पेंद्र कुमार स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। विभाग में कोरोना संक्रमण मिलने पर स्वयं जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर भी कार्य किया। जिससे अन्य साथियों पर अधिक भार न पड़े।
विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका पालन कर रहा हूं और लोगों से समय-समय पर कोरोना से बचाव के लिए जागरूक कर रहा हूं। पालन करने से एक दिन हम अवश्य कोरोना से जंग जीतने में सफल होंगे।