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दिवाली के चार दिन बाद भी सांस लेना मुश्किल

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बुलंदशहर के शिकारपुर रोड स्थित सड़क पर उड़ती धूल। - फोटो : BULANDSHAHR
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दिवाली के चार दिन बाद भी सांस लेना मुश्किल
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बुलंदशहर। बुलंदशहर की हवा में सोमवार को भी सुधार नजर नहीं आया। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 397 रहा। स्मॉग के चलते सांस के रोगियों की भी समस्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन पांच से सात सांस रोगी उपचार कराने पहुंच रहे हैं।
दिवाली त्योहार के दौरान मौसम में आई नमी के साथ वातावरण में आतिशबाजी के धुंए से घुला जहर अभी भी बरकरार है। पिछले तीन दिन की अपेक्षा हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार तो हुआ, लेकिन अभी हवा की सेहत खराब है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर प्रदूषण का दुष्प्रभाव अधिक हो रहा है। सोमवार को जिले का एक्यूआई 397 मापा गया, जो देश के प्रदूषित 139 शहरों में 13वें नंबर पर रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से वायु मंडल में धूल और धुएं के कण मिलकर वायु की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं, उसको सामान्य करने के लिए बारिश बेहद जरूरी है।
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सर्दी, प्रदूषण से बीमार हो रहे बच्चे
सर्दी के साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इसकी वजह से बच्चों में सर्दी, जुकाम और खांसी के साथ ही सिर दर्द की शिकायत सामने आ रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम आनंद ने बताया कि बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसलिए उनकी सेहत पर प्रदूषण का असर ज्यादा होता है। बच्चों की सेहत पर वायु प्रदूषण का प्रभाव तेजी से होता है।
पांच दिन का एक्यूआई
दिन/तारीख एक्यूआई
चार नवंबर 386
पांच नवंबर 444
छह नवंबर 433
सात नवंबर 424
आठ नवंबर 397
आतिशबाजी के प्रयोग एवं वाहनों से उत्सर्जित धुंए में घुलनशील कार्बनिक तत्वों से प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा है। पिछले दिनों की उपेक्षा धीरे-धीरे वायु प्रदूषण में सुधार देखने को मिल रहा है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में मौसम साफ हो जाएगा।
- सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
लापरवाही: न धूल और न धुआं रोकने के इंतजाम
बुलंदशहर। प्रदूषण बढ़ने के बावजूद जिलेभर में लापरवाही लगातार जारी है। न तो धूल रोकने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही धुएं पर लगाम लगाई जा सकी है।
वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा-पराली जलने से उठने वाला धुआं, और निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल/डस्ट लोगों को परेशान कर रही है। संबंधित विभागों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। सड़क निर्माण और सीवर लाइन निर्माण कर रही संस्थाएं दिन में एक बार पानी छिड़काव कराकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ले रही हैं।
खुले में रखी निर्माण सामग्री
नगर समेत जिलेभर में खुले में निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। नाला और सीवर लाइन निर्माण कार्य के दौरान सड़कों पर पड़ी मिट्टी न उठने या छिड़काव आदि न कराए जाने के कारण वाहनों के गुजरने पर धूल का गुबार हवा में उठ जाता है। इससे भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए जा रहे।
जरूरी हैं यह सावधानियां
- चौराहों पर बेहतर किया जाए यातायात प्रबंधन
- चौराहों पर ठहराव के दौरान बंद रखें वाहन का इंजन
- धूल भरी और निर्माणाधीन सड़कों पर नियमित हो जल का छिड़काव
- चौराहों पर किया जाए फव्वारों का संचालन
- सांस के मरीज सुबह-शाम टहलने से बनाएं दूरी
- घर से बाहर निकलते समय मुंह और नाक को ढककर रखें
- सांस की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लेुं
नगर पालिका और जल निगम को नोटिस जारी कर कार्यस्थल पर पानी के छिड़काव के निर्देश दिए जाएंगे। यदि इसके बाद भी पानी का छिड़काव नहीं किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन
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वायु प्रदूषण पर रोकथाम के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए है। कूड़ा और पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विवेक कुमार मिश्र, एडीएम वित्त/नोडल अधिकारी
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