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इनसे सीखो...जोश, जज्बा कैसे रखना है बरकरार

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बदायूं। किसी भी राष्ट्र के निर्माण में वहां के युवाओं की भूमिका बेहद अहम होती है। हर वर्ष 12 दिसंबर स्वामी विवेकानंद की जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। स्वामी विवेकानंद की यह लाइन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा देने का काम करती है।
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जिले में ऐसे युवाओं की कमी नहीं है जो खुद के दम पर सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इनमें कुछ सफल हुए हैं और कुछ अभी मंजिल से दूर हैं। खुद का व्यवसाय हो या फिर शिक्षा-चिकित्सा और खेल का क्षेत्र। समाजसेवा, पर्यावरण और जागरूकता के लिए काम करने वाले युवाओं की कमी नहीं है। ऐसे युवा भी हैं जिन्होंने स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम छेड़ रखी है। यह युवा दूसरों के लिए भी प्रेरणाप्रद हैं।
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कमजोर वर्ग के युवाओं को मुफ्त कोचिंग दे रहे देवाशीष
शहर में मंडी समिति के पास रहने वाले देवाशीष उच्च शिक्षित हैं। शिक्षा के क्षेत्र में वह कुछ करना चाहते हैं। युवा वर्ग को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और आगे बढ़ाने की मुहिम पर काम कर रहे हैं। देवाशीष ने अपने कुछ उच्च शिक्षित साथियों के साथ मिलकर सिविल लाइंस क्षेत्र में माल गोदाम रोड पर कोचिंग शुरू की थी। यहां वह कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को मुफ्त कोचिंग दे रहे हैं। अन्य शिक्षित युवाओं का भी देवाशीष को सहयोग मिल रहा है।
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उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं को आगे ला रहे अभय
म्याऊ के रहने वाले अभय प्रताप सिंह युवा व्यापारी और उद्यमी हैं। हालांकि, उनको व्यापार विरासत में मिला था, लेकिन उन्होंने न सिर्फ इसे आगे बढ़ाने का काम किया बल्कि युवा वर्ग को अपने साथ जोड़कर उसको भी व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम किया। अभय एक मुहिम चलाकर युवाओं को स्वरोजगार को लेकर प्रेरित कर रहे हैं। उनके साथ मिलकर उन्होंने कुछ छोटी इकाइयां भी स्थापित की हैं।
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पर्यावरण के लिए युवाओं को एक मंच पर लाए शांतनु
सिविल लाइंस निवासी शांतनु दुबे पर्यावरण संरक्षण के लिए युवा वर्ग को एक मंच पर लाने की मुहिम में लगे हुए हैं। इसमें वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर पर्यावरण योद्धा नाम से ग्रुप बनाने के बाद शांतनु ने जिले भर में युवाओं को इस मुहिम से जोड़ा है। गौर करने वाली बात यह है कि उनकी यह मुहिम गांवों तक पहुंच रही है। हालांकि, कोरोना काल में काम भी प्रभावित हुआ है।
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सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित हैं सार्थक
सार्थक द्विवेदी कक्षा आठ से ही समाजसेवा से जुड़ गए थे। सामाजिक और राजनीतिक विषयों में भागीदारी उनको पसंद है। किशोर अवस्था में ही उन्होंने ‘मदद एक पहल’ नामक संस्था का गठन कर गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा शुरू कर दी। तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह का भी काफी सहयोग मिला तो यह संस्था गरीबों को भोजन और वस्त्र भी उपलब्ध कराने लगी। उनकी संस्था से कई नामी लोग जुड़े हैं।
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इंश्योरेंस के साथ मेंथा व्यापार में भी कमल ने कमाया नाम
कमल आहूजा ने काफी छोटे स्तर से इंश्योरेंस का काम शुरू किया था। इस काम में पैर जमने के बाद उन्होंने मेंथा का काम भी शुरू कर दिया। अब उनके दोनों काम काफी अच्छे चल रहे हैं। कमल आहूजा कई युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले तो उसे मंजिल पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। बस रास्ते से भटकना नहीं है।
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प्रशांत ने शेयर बाजार में बनाई पहचान
शहर के जवाहरपुरी निवासी प्रशांत सक्सेना ने शेयर बाजार में अच्छी पहचान बना ली है। आगरा की एक कंपनी से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने घर से ही शेयर बाजार का काम चालू किया। अपने कुछ खास मित्रों और रिश्तदारों का ग्रुप बनाकर वह शेयर बाजार में कारोबार करते हैं। प्रशांत के साथ उनके ग्रुप में शामिल अन्य लोगों को भी अच्छा मुनाफा होता है। प्रशांत अब शेयर बाजार के काम को विस्तार देना चाहते हैं।
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सचिन, विराट और रोहित को रोल मॉडल मानते हैं युवा क्रिकेटर
बदायूं। शहर समेत जिले की बात करें तो खेल प्रतिभाओं की यहां कमी नहीं है। क्रिकेट के क्षेत्र में युवा वर्ग ज्यादा अच्छा कर रहा है। कई खिलाड़ी अंडर 16 तक जगह बना चुके हैं। यह क्रिकेटर सचिन, विराट और रोहित शर्मा को अपना रोल मॉडल मानते हैं। मंडल और प्रदेश तक क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके युवा क्रिकेटरों का सपना रणजी ट्रॉफी और फिर देश के लिए खेलना है।
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युवा क्रिकेटर अनिरुद्ध अंडर 16 की टीम में कई टूर्नामेंट खेल चुके हैं। जिला और मंडल स्तर पर भी कई मैचों में हिस्सा ले चुके हैं। वह सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली को रोल मॉडल मानते हैं। अनिरुद्ध का सपना टीम इंडिया में जगह बनाने का है। इसके लिए वह नियमित अभ्यास भी करते हैं।
युवा क्रिकेटर माधव का कहना है कि स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन संसाधन और अवसरों के अभाव में खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रहीं। जिले के कुछ खिलाड़ी प्रदेश स्तर तक तो पहुंचने, लेकिन वह वहां अपनी जगह को बनाए नहीं रख सके। अब नए खिलाड़ी काफी बेहतर कर रहे हैं। संवाद
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