संवाद करती महिला अधिवक्ता। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। दुष्कर्म के मामले में फंसे सपा सरकार के मंत्री रहे गायत्री प्रजापति को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। वहीं बुलंदशहर मामले में इसी तरह के अपराध में आरोपी को भी सजा ए मौत सुनाई गई है। अमर उजाला ने इस तरह की सजाओं को लेकर महिला वकीलों से संवाद किया। महिला वकीलों का कहना था कि कोर्ट इस तरह के मामलों में बहुत तेजी से कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में यह भी जरूरी है कि पुलिस भी गंभीरतम अपराधों में ज्यादा संवेदनशील बने।
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मंत्री हों या अफसर, कानून की नजर में सब बराबर हैं। महिला के पास उसका सम्मान ही सबसे बड़ा गहना होता है। अगर इस पर आंच आती है तो वह बड़ा अपराध है। कोर्ट ऐसे मामलों में शुरू से संवेदनशील रहा है। कई बार शुरुआती दौर में पुलिस की ढुलमुल भूमिका से इंसाफ मिलने में देर होती है।
- शिवानी यादव
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महिला अपराध के सभी उपयुक्त कानून होते हुए भी कई बार महिलाओं को सही और समय पर पूर्ण न्याय नहीं मिल पाता है। कुछ लोगों में उचित इच्छा शक्ति नहीं होती। महिलाओं में भी अपने प्रति होने वाले अपराधों को लेकर जागरूकता की कमी है। उन्हें इस संबंध में और जागरूक होना होगा।
- कमलेश श्रीवास्तव
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पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के मामले में कोर्ट के फैसले ने यह साबित किया है कि कानून के शिकंजे से कोई बच नहीं सकता पिछले दिनों जिले के बिल्सी कांड में भी एक पूर्व राजनेता को सजा सुनाई गई थी। कोर्ट के इस तरह के निर्णय भयमुक्त वातावरण बनाने को जरूरी हैं।
- आरती राठौर
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मंत्री और बुलंदशहर के मामलों में हुए फैसले उन लोगों के लिए सबक हैं जो महिलाओं को सम्मान की नजर से नहीं देखते। भारत में नारी को दुर्गा स्वरूपा माना जाता है। कोर्ट महिलाओं का सम्मान लौटाने और इसे कुचलने वालों पर चाबुक चलाने का काम कर रहा है। पुलिस को भी कुछ और संवेदनशील होना चाहिए।
- प्रेमवती मौर्य